पटना: New Government Formation in Bihar बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें नई सरकार में पार्टी की भूमिका तथा उपमुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा की गई। सुबह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री जमा खान और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री आवास पर करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में सरकार गठन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक के बाद बाहर निकले मंत्री जमा खान ने कहा कि बिहार में नई सरकार का गठन होने जा रहा है और 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। इधर, पटना के जिलाधिकारी (डीएम) त्यागराजन लोकभवन पहुंचे, जहां वे लगभग 30 मिनट तक रुके। बताया जा रहा है कि उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के संबंध में राज्यपाल को जानकारी दी। इस बीच, 14 अप्रैल का दिन भी अहम माना जा रहा है। इस दिन सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मौजूदा मंत्रिपरिषद की अंतिम बैठक होगी। बैठक के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, जिसके साथ ही वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी मौजूदगी में विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
किसे मिलेगी बिहार की कमान?
New Government Formation in Bihar ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निवर्तमान बिहार सरकार में महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सबसे आगे हैं। इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी इस रेस में हैं। राज्य के BJP नेता अपनी स्थिति को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। प्रदेश BJP के पूर्व अध्यक्ष और मंत्री दिलीप जायसवाल ने एक दिन पहले कहा था, “अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह फैसला हमारे केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। मैं इस दौड़ में बिल्कुल भी नहीं हूं।” अन्य संभावित नेताओं में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और राज्य मंत्री लखेंद्र पासवान और श्रेयसी सिंह के नाम शामिल हैंl। BJP सूत्रों के अनुसार, ये सभी नेता अलग-अलग मायनों में इस पद के लिए उपयुक्त हैं। सूत्रों ने बताया कि पासवान दलित हैं। उनके प्रमोशन से BJP को अपनी ‘उच्च जाति समर्थक’ छवि से उबरने में मदद मिल सकती है। इसका हिंदी भाषी क्षेत्रों में एक अलग ही नुकसान है क्योंकि वर्ष 1990 के दशक के मंडल आंदोलन की छाया आज भी कायम है। BJP सूत्रों ने स्वीकार किया कि केंद्रीय नेतृत्व द्वारा आश्चर्यजनक कदम उठाए जाने की प्रबल संभावना है। उन्होंने पार्टी द्वारा शासित कई राज्यों के उदाहरण दिए, जहां हाल के दिनों में कम लोकप्रिय नेताओं को शीर्ष पद मिले हैं।