ओवैसी ने बंगाल में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना की

ओवैसी ने बंगाल में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना की

ओवैसी ने बंगाल में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना की
Modified Date: April 5, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: April 5, 2026 10:36 pm IST

पटना, पांच अप्रैल (भाषा) एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राज्य के सरकारी क्षेत्र में मुसलमानों के ‘असंतोषजनक’ प्रतिनिधित्व के लिए आलोचना की और टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) शासन के दौरान उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए।

उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में, जहां इस महीने विधानसभा चुनाव होने हैं, मुसलमान ‘अत्यंत गरीबी’ में जी रहे हैं।

बिहार की राजधानी पटना में पत्रकारों द्वारा टीएमसी के घोषणापत्र के उर्दू में प्रकाशन के बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी मुसलमानों के प्रति दोहरा रवैया अपनाती हैं। उनकी पार्टी ने अपना घोषणापत्र उर्दू में जारी किया है, लेकिन पश्चिम बंगाल (सरकारी क्षेत्र) में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व का स्तर असंतोषजनक बना हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी लगभग 29 प्रतिशत है, लेकिन केवल सात प्रतिशत को ही सरकारी नौकरियां मिली हैं।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ने दावा किया, ‘‘मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में मुसलमान घोर गरीबी में रहते हैं।’’ ओवैसी की पार्टी ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन किया है।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में स्कूल छोड़ने की सबसे उच्च दर मुसलमानों में है। उन्होंने दावा किया, “पिछले साल कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पांच लाख अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र रद्द कर दिए, जिनमें से लगभग तीन लाख मुसलमानों के थे।’’

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे। मतगणना चार मई को होगी।

ओवैसी ने केंद्र सरकार की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने वाले विधेयकों को पारित करने के लिए संसद के बजट सत्र को संक्षिप्त अवकाश के बाद पुनः बुलाया, ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा में सीट की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक को आदर्श रूप में 29 अप्रैल (जारी विधानसभा चुनावों में मतदान का अंतिम दिन) के बाद पेश किया जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में सांसद चुनावों में व्यस्त हैं।’’

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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