पटना उच्च न्यायालय ने दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द किया, हर्जाना देने को कहा

पटना उच्च न्यायालय ने दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द किया, हर्जाना देने को कहा

पटना उच्च न्यायालय ने दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने का आदेश रद्द किया, हर्जाना देने को कहा
Modified Date: September 17, 2026 / 01:30 pm IST
Published Date: September 17, 2026 1:30 pm IST

पटना, 17 सितंबर (भाषा) पटना उच्च न्यायालय ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (बीसीसीए) के तहत दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित कर उनकी आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश रद्द करते हुए कहा कि नालंदा जिला प्रशासन ने उचित सत्यापन के बिना कार्रवाई की थी।

अदालत ने राज्य सरकार को दोनों याचिकाकर्ताओं को एक-एक लाख रुपये हर्जाना प्रदान करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने 11 सितंबर के अपने आदेश में मुकदमेबाजी के कारण हुए खर्च की भरपाई के रूप में दोनों याचिकाकर्ताओं को 10-10 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह ने नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा उन्हें ‘असामाजिक तत्व’ घोषित करने की संस्तुति के आधार पर शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी।

यह संस्तुति वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव और छठ पूजा के दौरान राजगीर के अनुमंडलीय पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि उन्हें आपराधिक मामलों में झूठा फंसाया गया था और वे पहले से ही जमानत पर थे।

अदालत ने कहा, “एसडीपीओ की रिपोर्ट के आधार पर नालंदा के एसपी ने याचिकाकर्ताओं को असामाजिक तत्व घोषित करने की संस्तुति की, जिसके परिणामस्वरूप उनके खिलाफ बीसीसीए वाद संख्या 178/2025 और 183/2025 दर्ज किए गए।”

अदालत के अनुसार, मामले दर्ज होने के बाद नालंदा के जिलाधिकारी (डीएम) ने 10 सितंबर, 2025 को दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जिलाधिकारी ने यह कहते हुए कार्रवाई की कि याचिकाकर्ता अपने बचाव में कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सके और उनकी स्वतंत्र आवाजाही से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

भाषा कैलाश

मनीषा संतोष

संतोष


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