शिवराज सिंह चौहान ने वैशाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की

शिवराज सिंह चौहान ने वैशाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की

शिवराज सिंह चौहान ने वैशाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की
Modified Date: September 16, 2026 / 12:49 pm IST
Published Date: September 16, 2026 12:49 pm IST

पटना, 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा के लिए बुधवार को एक दिवसीय दौरे के दौरान वैशाली जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

चौहान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ वैशाली जिले के तेरसिया और सरायपुर गांवों का नाव से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का भी आकलन करेंगे और किसानों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे।

आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) के बुधवार को जारी बयान के अनुसार, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा और पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण बिहार के 15 जिलों में करीब 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित जिले पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया हैं।

अधिकारियों ने बताया कि चौहान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और आम लोगों से बातचीत करेंगे तथा मुख्यमंत्री की मौजूदगी में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे।

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री नवाबगढ़ी (मुंगेर) स्थित राहत शिविर का भी दौरा करेंगे और वहां रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह भागलपुर जाएंगे, जहां नवगछिया के कोजिकरैया तटबंध का निरीक्षण करेंगे। शाम को वह भागलपुर पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित राहत शिविर में आश्रय लिए परिवारों से मिलकर उनका हालचाल जानेंगे।

इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने चौहान के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की विलंबित प्रतिक्रिया की आलोचना की। उन्होंने कहा, “आप लोगों को आने में बहुत देर हो गई। बिहार की पीड़ा इनके (राजग नेताओं) मन में नहीं है। अब सुन रहा हूं कि वे चार्टर्ड विमान से आ रहे हैं। यदि उसी पैसे को बाढ़ पीड़ितों की मदद पर खर्च किया जाता, तो कहीं बेहतर होता।”

भाषा कैलाश मनीषा

मनीषा


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