पटना में पीएचडी शोधार्थी, अतिथि शिक्षक तीन सप्ताह से जारी धरना खत्म करने पर सहमत: अधिकारी
पटना में पीएचडी शोधार्थी, अतिथि शिक्षक तीन सप्ताह से जारी धरना खत्म करने पर सहमत: अधिकारी
पटना, 24 अगस्त (भाषा) बिहार में पीएचडी शोधार्थियों और अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को राज्यपाल सैयद अता हसनैन के साथ कई मांगों को लेकर सहमति बनने के बाद 21 दिनों से जारी अपना आंदोलन वापस लेने पर सहमत हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह निर्णय ‘ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन’ के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और राज्यपाल के बीच लोक भवन में करीब दो घंटे की बैठक के बाद लिया गया।
शोधार्थी और अतिथि शिक्षक चार अगस्त से आंदोलनरत थे। इस दौरान कुमुद पटेल लगातार आमरण अनशन पर बैठे हुए थे।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में यूजीसी विनियम-2018 की तालिका-3ए लागू करना, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करना, विश्वविद्यालयों में नियमित नियुक्तियां, अधिवास नीति लागू करना, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता बहाल करना तथा लंबे समय से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा के साथ नियमित करना शामिल था।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किए जाने के कारण वे अपना अनशन समाप्त करेंगे।
बयान में कहा गया कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति अधिनियम-2026 आवश्यक संशोधन होने तक स्थगित रहेगा।
इसके अनुसार, राज्यपाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से परामर्श के बाद 15 दिनों के भीतर बिहार के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी प्रशासकों की एक समिति गठित करेंगे, जो आंदोलनकारियों की मांगों की समीक्षा करेगी।
समिति सहायक प्राध्यापकों की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष बहाल करने तथा लिखित परीक्षा और एपीआई (अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक) अंकों को मिलाकर मेधा सूची तैयार करने के प्रस्ताव पर विचार करेगी।
बयान में कहा गया कि समिति एपीआई की गणना में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के अंकों को बाहर रखने, नेट/जेआरएफ के भारांक को यथावत रखते हुए पीएचडी के भारांक को न्यूनतम 30 प्रतिशत करने तथा शोध प्रकाशनों और अनुभव को स्पष्ट परिभाषा के साथ शामिल करने के सुझावों की भी समीक्षा करेगी।
इसके अलावा समिति अतिथि सहायक प्राध्यापकों को संविदा सहायक प्राध्यापकों के समान न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता देने, सभी विश्वविद्यालयों में एक समान नवीकरण प्रक्रिया लागू करने तथा योग्यता, शोधपत्र और अनुभव के सत्यापन के बाद पात्र अतिथि शिक्षकों को 65 वर्ष तक कार्य करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी।
बयान के अनुसार, समिति अधिकतम आयु सीमा को एक बार घटाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से कम करने तथा रिक्त पदों पर प्रत्येक वर्ष नियमित सहायक प्राध्यापक भर्ती सुनिश्चित करने की मांग पर भी गौर करेगी।
भाषा कैलाश आशीष
आशीष

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