आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता, यह संवैधानिक अधिकार है : आठवले

आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता, यह संवैधानिक अधिकार है : आठवले

आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता, यह संवैधानिक अधिकार है : आठवले
Modified Date: August 22, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: August 22, 2026 8:52 pm IST

पटना, 22 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शनिवार को कहा कि आरक्षण ‘‘संवैधानिक अधिकार’’ है और इसे खत्म करने की मांग को उन्होंने ‘‘असंवैधानिक’’ बताया।

पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य ने इसके खिलाफ सोशल मीडिया अभियान चलाए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए आरक्षण खत्म करने की मांग की, जबकि कुछ अन्य ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर इसे समाप्त करने की बात कही। लेकिन, आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है।’’

आठवले ने कहा कि आरक्षण का विस्तार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तक हुआ है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सभी जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ मिल रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत अस्पृश्यता पर रोक लगाई गई है, लेकिन ‘‘ग्रामीण भारत में अनुसूचित जाति समुदायों के खिलाफ जातिगत भेदभाव और अत्याचार अब भी जारी हैं।’’

आठवले ने कहा, ‘‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। जो लोग आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, उन्हें पहले जाति व्यवस्था समाप्त करनी चाहिए। जब जाति व्यवस्था खत्म हो जाएगी, तब हम आरक्षण पर जोर नहीं देंगे।’’

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार आरक्षण की रक्षा करने और सभी को न्याय दिलाने के लिए काम कर रही है।

आठवले ने कहा, ‘‘हमारी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) 2014 से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की सहयोगी रही है। हमारा प्रयास है कि सभी जरूरतमंद समुदायों को आरक्षण मिले और वर्तमान में उन्हें इसका लाभ मिल रहा है।’’

आठवले ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति में भी बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समिति में चार हिंदू और चार बौद्ध सदस्य हैं, जबकि इसमें आठ बौद्ध न्यासियों को शामिल किया जाना चाहिए।

आठवले ने कहा, ‘‘समिति का संचालन 1949 के बोधगया मंदिर अधिनियम के तहत होता है, जो भारतीय संविधान से पहले का कानून है। हम हिंदुओं या किसी अन्य धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारी मांग है कि बौद्धों के पूजा स्थल का संचालन बौद्ध समुदाय द्वारा ही किया जाए। मैंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से समय मांगा है और इस विषय पर राज्यपाल से भी मुलाकात करूंगा।’’

संवाददाता सम्मेलन में मौजूद कई बौद्ध भिक्षुओं ने इस मांग के समर्थन में पटना के गर्दनीबाग क्षेत्र में पांच दिन का अनशन करने की घोषणा की।

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में