पटना के जनरल अस्पताल भवन के ध्वस्तीकरण का काम शुरू, महात्मा गांधी ने 1947 में किया था दौरा

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पटना के जनरल अस्पताल भवन के ध्वस्तीकरण का काम शुरू, महात्मा गांधी ने 1947 में किया था दौरा

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  • Publish Date - September 7, 2026 / 08:59 PM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 08:59 PM IST

पटना, सात सितंबर (भाषा) पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) परिसर में स्थित ऐतिहासिक पुराने जनरल अस्पताल भवन के प्रसिद्ध ‘हथवा वार्ड’ को सोमवार को बुलडोजर से गिराने का काम शुरू कर दिया गया। इसके साथ ही 120 साल से अधिक पुरानी इस ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस भवन का दौरा महात्मा गांधी ने मई 1947 में किया था।

पिछले कुछ वर्षों से ‘पीएमसीएच एलुमनाई एसोसिएशन’, विरासत प्रेमियों, गांधीवादी और कई जाने-माने डॉक्टर बिहार सरकार से प्रतिष्ठित पुराने बांकीपुर जनरल अस्पताल भवन तथा परिसर की कुछ अन्य ऐतिहासिक इमारतों को ध्वस्त नहीं करने और इन इमारतों को संस्थान के ‘‘गौरवशाली अतीत की यादों’’ के रूप में संरक्षित किए जाने की अपील कर रहे थे।

पीएमसीएच की पुरानी इमारतों को चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जा रहा है। यह संस्थान 101 साल से भी पहले तत्कालीन बिहार और उड़ीसा के पहले मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित हुआ था। राजधानी के बीचों-बीच गंगा किनारे स्थित इसके विशाल परिसर में अब इनकी जगह आधुनिक और ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं।

इस संस्थान की स्थापना 1925 में मूल रूप से ‘प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज’ के नाम से हुई थी। इसका नामकरण तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में महाराजा एडवर्ड अष्टम) की दिसंबर 1921 में पटना यात्रा की स्मृति में किया गया था। भारत की आजादी के कुछ दशकों बाद इसका नाम बदलकर पीएमसीएच कर दिया गया।

यह मेडिकल कॉलेज 1874 में पटना में स्थापित टेंपल मेडिकल स्कूल से विकसित हुआ था। बांकीपुर जनरल अस्पताल (बाद में पटना जनरल अस्पताल) का निर्माण करीब 1904 में हुआ था। यह अस्पताल पहले मेडिकल स्कूल और बाद में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया।

कुछ महीने पहले पीएमसीएच के करीब एक सदी पुराने पहले छात्रावास ‘ओल्ड बॉयज हॉस्टल’ को भी पुनर्विकास परियोजना के तहत गिरा दिया गया था। यह छात्रावास पुराने जनरल अस्पताल भवन के सामने स्थित था। इस घटना से बिहार से लेकर ब्रिटेन तक रहने वाले कई पूर्व छात्र दुखी हुए और इससे जुड़ी उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं।

इस छात्रावास को गिराने की कार्रवाई कॉलेज की 101वीं वर्षगांठ के आयोजन के महज दो महीने बाद हुई थी। वर्षगांठ समारोह ओल्ड बॉयज हॉस्टल के परिसर में ही आयोजित किया गया था।

पुराने जनरल अस्पताल भवन को गिराने की तैयारियां पिछले कुछ महीनों से जारी थीं। इसके तहत भवन के पुराने दरवाजे और खिड़कियां निकाल दी गई थीं, ताकि ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ हो सके।

दो मंजिला पुराने बांकीपुर जनरल अस्पताल भवन में ब्रिटिश काल की एक लिफ्ट लगी हुई है। इसमें उत्तर दिशा में हथवा वार्ड और दक्षिण दिशा में गुजरी वार्ड स्थित थे। भवन के भूतल और पहली मंजिल पर अन्य चिकित्सा वार्ड भी थे।

पीएमसीएच के लगभग सभी वार्ड और अधीक्षक का कार्यालय परिसर में बनी नयी इमारतों में स्थानांतरित किए जा चुके हैं। इन नयी इमारतों का पिछले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से उद्घाटन किया गया था।

पीएमसीएच के विशाल पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आठ फरवरी 2021 को परिसर में रखी थी।

पुनर्विकास योजना के तहत इस स्थान पर 5,540 करोड़ रुपये की लागत से 5,462 बिस्तरों वाला अस्पताल परिसर बनाया जाएगा। परियोजना को सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किए जाने की उम्मीद है।

हालांकि, इस प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में पढ़े और अब अमेरिका, ब्रिटेन तथा अन्य देशों में सेवा दे रहे कई पूर्व छात्रों के साथ-साथ पीएमसीएच में कार्यरत चिकित्सकों ने इस बात पर अफसोस जताया कि पुनर्विकास परियोजना में संस्थान की प्रसिद्ध विरासत इमारतों के संरक्षण को ‘‘ध्यान में नहीं रखा गया’’।

गांधीवादियों और विरासत प्रेमियों ने भी इस प्रतिष्ठित ऐतिहासिक इमारत और परिसर की अन्य विरासत संरचनाओं को बचाने की अपील की थी, लेकिन उनकी अपील बेअसर रही। परिसर की कई ऐतिहासिक इमारतें पहले ही पूरी तरह या आंशिक रूप से गिराई जा चुकी हैं।

भाषा सुरभि माधव

माधव