भाजपा, राजद या कांग्रेस से नहीं होगा कोई गठबंधन, जनता ही हमारी सहयोगी: प्रशांत किशोर

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भाजपा, राजद या कांग्रेस से नहीं होगा कोई गठबंधन, जनता ही हमारी सहयोगी: प्रशांत किशोर

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 09:03 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 09:03 PM IST

पटना, तीन अगस्त (भाषा) जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनकी जीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे दलों के असंतुष्ट समर्थकों के सहयोग से संभव हुई।

किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों से हराने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही।

बांकीपुर विधानसभा सीट पर 1995 से भाजपा लगातार जीत दर्ज करती रही थी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह अब अकेले चुनाव लड़ने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करेंगे, किशोर ने कहा, ‘‘हम किसी से गठबंधन नहीं करेंगे। हमारा गठबंधन बिहार की जनता के साथ होगा। आपने देखा कि बांकीपुर की जनता ने स्थापित राजनीतिक दलों को छोड़कर हमें समर्थन दिया है।’’

इस जीत के साथ जन सुराज पार्टी को बिहार विधानसभा में पहली बार प्रतिनिधित्व मिलेगा।

किशोर ने कहा, ‘‘मैं आम नागरिकों के साथ-साथ उन लोगों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने जन सुराज के सदस्य नहीं होने के बावजूद हमारी मदद की। ऐसे लोग भाजपा, राजद और कांग्रेस समेत सभी दलों में थे।’’

गौरतलब है कि पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी थी।

ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव की जीत को नवगठित पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

किशोर लगातार इस उपचुनाव को भाजपा नीत बिहार सरकार पर ‘‘जनमत संग्रह’’ बताते रहे थे।

यह उपचुनाव भाजपा के पांच बार के विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद हुआ था, जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राज्यसभा के लिए चुना गया।

किशोर ने इससे पहले कहा था कि भाजपा की हार ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए चेतावनी’’ है और उन्हें ‘‘आपराधिक पृष्ठभूमि’’ वाले सम्राट चौधरी की जगह किसी ‘‘शिक्षित और स्वच्छ छवि’’ वाले व्यक्ति को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा किसी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) नेता को मुख्यमंत्री बनाए रखना चाहती है तो उसे ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जिसकी शिक्षा अच्छी हो और जिसकी छवि बेदाग हो।

हालांकि, विपक्षी गठबंधन में शामिल होने को लेकर किशोर की अनिच्छा के बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि हालिया छात्र आंदोलनों से बने माहौल का लाभ उठाने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन उन्हें अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर सकता है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक बयान में कहा, ‘‘हम जनता के जनादेश को नमन करते हैं। हम इस हार से सबक लेंगे और अपने विरोधियों की तरह हर चुनावी हार का ठीकरा ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर नहीं फोड़ेंगे।’’

वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘प्रशांत किशोर की ऊर्जा और संगठन क्षमता किसी से छिपी नहीं है। ‘इंडिया’ गठबंधन को उनसे संपर्क करना चाहिए। बांकीपुर की जीत को व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।’’

तिवारी ने कहा कि हाल में जंतर-मंतर, बिहार और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र आंदोलनों ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को दर्शाया है।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को वैचारिक संकोच छोड़कर प्रशांत किशोर से संपर्क करना चाहिए।

तिवारी ने कहा कि कांग्रेस, राजद और वाम दलों को मौजूदा राजनीतिक माहौल का लाभ उठाना चाहिए।

तिवारी पहले राजद और जनता दल (यूनाइटेड) जैसे दलों से जुड़े रहे हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘‘यह हार ऐसे समय हु‍ई है, जब इससे अधिक नुकसानदेह कुछ नहीं हो सकता था। छात्र आंदोलनों ने युवाओं, खासकर सवर्ण समुदाय के बीच हमारे कमजोर होते समर्थन को उजागर किया है, जो हमारा पारंपरिक आधार रहा है।’’

उन्होंने कहा कि विवादित यूजीसी नियमों को लेकर भी कुछ वर्गों में नाराजगी थी और अब उन्हें लगने लगा है कि उनकी उपेक्षा की जा रही है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 इस वर्ष अधिसूचित किए गए थे।

इनका उद्देश्य जाति आधारित भेदभाव समाप्त करना और सभी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में समान अवसर सुनिश्चित करना बताया गया था।

हालांकि, सामान्य वर्ग के कई संगठनों ने इन नियमों का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि इनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा दर्ज कराए जाने वाले कथित झूठे मामलों से सामान्य वर्ग के लोगों के संरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने इन प्रस्तावित नियमों पर अंतरिम रोक लगा रखी है।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र