पटना, एक जुलाई (भाषा) बिहार मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तर्ज पर राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों और पुलों पर पथ कर लगाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 29 प्रस्तावों पर मुहर लगी।
बैठक के बाद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘बिहार सरकार के स्वामित्व वाले पथ अवसंरचनाओं पर पथ कर लिए जाने के निर्णय के फलस्वरूप पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026’ को मंजूरी दे दी है।
उन्होंने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों, बड़े पुलों और बाईपास का उपयोग करने वाले वाहनों से श्रेणीवार पथ उपयोगकर्ता शुल्क लिया जाएगा।
चौधरी ने बताया कि हल्के मोटर वाहनों के लिए आधार पथ कर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि शुल्क संग्रहण को पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए फास्टैग तथा अन्य स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के माध्यम से डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी।
चौधरी ने कहा कि नियमावली के तहत विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए हैं और इनकी वार्षिक समीक्षा का प्रावधान किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि महंगाई तथा सड़क की स्थिति के आकलन के आधार पर शुल्क दरों में संशोधन किया जा सकेगा।
नयी व्यवस्था के अनुसार बिना फास्टैग वाले वाहनों से सामान्य दर की तुलना में अधिक उपयोगकर्ता शुल्क लिया जाएगा जबकि अधिभारयुक्त (ओवरलोडेड) वाहनों पर भी अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया जाएगा।
इसके तहत स्थानीय और नियमित यात्रियों को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार छूट तथा रियायती पास एवं बहु-यात्रा (मल्टीपल ट्रिप) सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्रिमंडल ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाले 51,923 करोड़ रुपये के बेसिक और निष्पादन अनुदान के वितरण एवं व्यय को मंजूरी दी।
यह राशि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के बीच वितरित की जाएगी।
सरकार के अनुसार इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय निकाय आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (आयडा) को राज्य सरकार की गारंटी पर 25,000 करोड़ रुपये तक का ऋण जुटाने की अनुमति प्रदान की।
सरकार का कहना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना मजबूत होगी तथा निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मंत्रिमंडल ने अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना के तहत गया जिले के डोभी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से चंदाग्राम होते हुए बभनदेव जंगल तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए 35.19 एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी भूमि पथ निर्माण विभाग को निःशुल्क अंतर्विभागीय स्थायी हस्तांतरण करने की भी स्वीकृति दी।
ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने एक जुलाई 2026 से राज्य के सभी 38 जिलों में ‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ लागू करने को मंजूरी दी।
इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिन तक अकुशल रोजगार की गारंटी मिलेगी।
योजना के क्रियान्वयन के लिए ‘बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी’ को नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना की लागत का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।
शहरी विकास के क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने पटना नगर निगम को 200 करोड़ रुपये तक का नगर निगम बॉण्ड जारी करने की अनुमति दी।
सरकार के अनुसार इससे यातायात प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने तथा अवैध वेंडिंग की समस्या के समाधान के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।
परिवहन क्षेत्र में बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधीन 31 बस डिपो एवं बस स्टैंड का निर्माण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर कराने का निर्णय लिया गया।
सरकार का दावा है कि इससे निगम को 200 से 300 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त होगा और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
मंत्रिमंडल ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत आगामी 20 जुलाई को पटना से लगभग 1,100 श्रद्धालुओं की विशेष ट्रेन से दो दिवसीय सोमनाथ यात्रा के लिए 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग कार्य संचालन (संशोधन) नियमावली, 2026’ के प्रारूप को मंजूरी दी गई, जिससे विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी।
मंत्रिमंडल ने राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना की तत्कालीन निलंबित राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो सोनी कुमारी को गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता के आरोप में सरकारी सेवा से बर्खास्त करने की स्वीकृति भी दी।
इसके अलावा, राज्य के राजस्व में वृद्धि के उद्देश्य से खनन योग्य पत्थर भूखंडों की बंदोबस्ती ई-नीलामी-सह-निविदा के माध्यम से कराने का अधिकार जिला समाहर्ताओं को देने का निर्णय लिया गया। इसके तहत न्यूनतम सुरक्षित मूल्य का निर्धारण खनन योग्य पत्थर की मात्रा एवं रॉयल्टी दर के गुणनफल में 25 प्रतिशत वृद्धि के आधार पर किया जाएगा।
भाषा कैलाश जोहेब
जोहेब