बिहार में वन्यजीव तस्करी पर होगी चौतरफा निगरानी, संवेदनशील मार्गों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी
बिहार में वन्यजीव तस्करी पर होगी चौतरफा निगरानी, संवेदनशील मार्गों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी
पटना, 18 सितंबर (भाषा) बिहार में वन्यजीव अपराध और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अब विभिन्न एजेंसियां साझा रणनीति के तहत काम करेंगी, जिसके तहत वन्यजीव तस्करी के संवेदनशील मार्गों और स्थलों की जीआईएस आधारित मैपिंग की जाएगी, जबकि रेलवे, सड़क और हवाई मार्ग से होने वाली आवाजाही पर निगरानी और कड़ी की जाएगी।
पटना के अरण्य भवन में बृहस्पतिवार को ‘बिहार में वन्यजीव विधि-प्रवर्तन को सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित अंतर-एजेंसी समन्वय बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, पुलिस, परिवहन, प्रवर्तन, सीमा, न्याय, विज्ञान तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों ने भाग लिया।
विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार बैठक में तस्करी के मामलों में केवल वन्यजीव या उसके अवशेष की बरामदगी तक कार्रवाई सीमित न रखकर तस्करी के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच करने पर भी सहमति बनी।
साथ ही टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से संवेदनशील मार्गों और संदिग्ध वाहनों की निगरानी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह ने बिहार की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए वन्यजीव अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी अंतर-एजेंसी समन्वय तंत्र विकसित करने और प्रमुख पारगमन स्थलों पर निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार ने अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई में आसूचना साझा करने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) मुख्यालय की पुलिस महानिरीक्षक व अपर निदेशक रुचिका ऋषि ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाले वन्यजीव अपराधों की रोकथाम तथा डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण के साथ विधिसम्मत कार्रवाई पर जोर दिया।
भाषा कैलाश जोहेब
जोहेब

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