धरमलाल कौशिक होंगे नेता प्रतिपक्ष, रमन ने बढ़ाया नाम, दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद बन पाई सहमति

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धरमलाल कौशिक होंगे नेता प्रतिपक्ष, रमन ने बढ़ाया नाम, दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद बन पाई सहमति

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  • Publish Date - January 4, 2019 / 06:03 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 04:29 PM IST

रायपुर। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को भारी कशमकश के बाद नेता प्रतिपक्ष चुन लिया गया है। केन्द्रीय पर्यवेक्षक थावरचंद गहलोत और अनिल जैन की मौजूदगी में विधायकों की बैठक में नाम को लेकर भारी खींचतान चली। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष धरमलाल कौशिक का नाम आगे बढ़ाया है, जबकि बृजमोहन अग्रवाल और ननकीराम कंवर अड़े हुए हैं। इसी बीच विधानसभा में पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहिले के पहुंचते ही यह हल्ला हो गया कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष चुन लिया गया है। दरअसल, बीजेपी के तमाम विधायक सदन में मौजूद नहीं हैं, वे पार्टी कार्यालय की बैठक में शामिल हैं। 

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बीजेपी में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर जमकर बवाल हुआ। केन्द्रीय पर्यवेक्षकों ने पार्टी दफ्तर में सभी विधायकों के साथ बैठक की, लेकिन अधिकांश विधायक बृजमोहन अग्रवाल या ननकीराम कंवर को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के पक्ष में है। पूर्व सीएम ने धरमलाल कौशिक का नाम आगे बढ़ाकर सभी को चौंका दिया है। धरमलाल का नाम सामने आते ही बैठक का माहौल गरमा गया और विधायकों द्वारा आपत्ति भी जताई गई। इस बीच दिल्ली को भी इस संबंध में हस्तक्षेप करना पड़ा। सूत्रों का कहना है कि नाम की सहमति नहीं बनने पर दिल्ली के बड़े नेताओं ने फोन कर सहमति बनाई, जिसके बाद नाम का ऐलान किया गया 

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ज्ञात हो कि गहलोत और जैन को एयरपोर्ट लेने बृजमोहन अग्रवाल और भीमा मंडावी पहुंचे थे। उसके बाद सीधे सभी एकात्म परिसर में विधायक दल की बैठक में शामिल हुए।आपको बता दें कि नेता प्रतिपक्ष के उम्मीदवारों की लिस्ट बहुत लंबी थी जिनमें रमन सिंह , बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, ननकीराम कंवर, नारायण चंदेल जैसे दिग्गज नेता भी नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल थे। ऐसे में एक पर मुहर लगाना पर्यवेक्षको को भी भारी हो रहा था। यहां ये बताना भी जरुरी है कि जब साल 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था उस वक्त भाजपा कार्यालय में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव पर जमकर हंगामा हुआ था उस समय छत्तीसगढ़ के तात्कालिक पर्यवेक्षक नरेंद्र मोदी को भी विरोध का सामना करना पड़ा था।