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रायपुर: CG News छत्तीसगढ़ के बालोद में, 9 से 13 जनवरी के बीच रेंजर-रोवर जंबूरी 2026 आयोजित होना है। कांग्रेस का आरोप है कि दुधली गांव में होने वाले आयोजन के लिए बिना किसी टेंडर के लाखों के काम हुए। इसमें केवल नियमों की अनदेखी ही नहीं हुई बल्कि लाखों की बंदरबाट का खेल हो रहा है। टेंडर कब हुआ, कहां से हुआ, किसके नाम पर खुला इसे लेकर अफसरों को मौन ने आरोपों को और गहरा दिया। हालांकि सत्तापक्ष का दावा है कि सारा काम पूरी पारदर्शिता से हुआ है। कांग्रेस को प्रक्रिया नहीं पता। तो क्या तथ्य हैं कांग्रेस के पास आरोपों को लेकर और क्या जवाब है बीजेपी के पास?
CG News छत्तीसगढ़ में पहली बार बालोद में रेंजर-रोवर-जंबूरी आयोजन होने वाला है। पहली बार प्रदेश को इसकी मेजबानी मिली जिसे लेकर जमीनी स्तर पर तैयारी लगभग पूरी है। करोड़ों के डोम, टेंट, स्टेडियम का काम पूरा हो चुका है लेकिन ये कार्य किसके आदेश से हुआ, किस फर्म या ठेकेदार ने किया, और सबसे बड़ी बात बिना टेंडर उसे ये काम कैसे मिला ? इस पूरे कार्य को लेकर अथॉरिटी DEO हैं, उन्हीं के खाते में आयोजन के लिए करोड़ों की रकम आई है और निकाली जा रही है लेकिन टेंडर की जानकारी ना तो उन्हें हैं ना किसी अन्य अफसर के पास।
बिना टेंडर जंबूरी आयोजन स्थल पर करोड़ों के काम हो जाने पर कांग्रेस ने इसमें सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, EOW ऑफिस पहुंचकर शिकायत की। विपक्ष ने दावा किया कि वो इस मामले में राज्यपाल से मिलेंगे और जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे।
इधऱ, प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस पर आरोपों को सिरे खारिज करते हुए दावा किया कि पूरा काम पारदर्शिता से हो रहा है, मंत्री ने बताया कि ये आयोजन भारत स्काउट एंड गाइड नेशनल का है जसमें राज्य स्तर पर होने वाले कार्यों का टेंडर जेम पोर्टल के जरिए हुआ। इसके लिए 400 से ज्यादा रोवर रेंजर बीते 3 दिसंबर से कार्य का रहे हैं।
कुल मिलाकर राज्य में होने वाले इस आयोजन को लेकर बिना टेंडर के हुए कार्य में कांग्रेस भारी भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाकर कोर्ट जाने की चेतावनी दे रही है तो बीजेपी सरकार का दावा है कि, आकंठ करप्शन में डूबी कांग्रेस को हर काम में वैसा ही नजर आता है। खैर, इन आरोप और सफाई से इतर सवाल ये है कि क्या वाकई करोड़ों के काम को बिना टेंडर, किसी खास को फायदा देकर प्रशासन को चूना लगाया गया या फिर ये महज सियासी शिगूफा है?