Samvida Karmchari Niyamitikaran: छत्तीसगढ़ के इन संविदा कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नियमित सेवा पर सुप्रीम कोर्ट की लगी मुहर, सालों की जंग के बाद कर्मचारियों की बड़ी जीत

Samvida Karmchari Niyamitikaran: छत्तीसगढ़ के इन संविदा कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नियमित सेवा पर सुप्रीम कोर्ट की लगी मुहर, सालों की जंग के बाद कर्मचारियों की बड़ी जीत

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  • Publish Date - January 5, 2026 / 10:31 PM IST,
    Updated On - January 5, 2026 / 10:33 PM IST

Samvida Karmchari Niyamitikaran/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को बड़ा झटका
  • 109 कर्मचारियों की नियमित सेवा पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की विश्वविद्यालय की याचिका

बिलासपुर: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत 109 Samvida Karmchari Niyamitikaran के मामले में विश्वविद्यालय को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय द्वारा दायर क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में कार्यरत 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को छत्तीसगढ़ राज्य शासन के 5 मार्च 2008 के नियमितीकरण आदेश के आधार पर 26 अगस्त 2008 को नियमित किया गया था। इसके पश्चात 15 जनवरी 2009 को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय केंद्रीय विश्वविद्यालय बना और सभी 109 कर्मचारी नियमित कर्मचारी के रूप में केंद्रीय विश्वविद्यालय का हिस्सा बन गए।

109 कर्मचारियों की नियमित सेवा पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर (Contract Employee Regularization Order)

नियमितीकरण आदेश के अनुपालन में कर्मचारियों ने कार्य प्रारंभ किया और 31 मार्च 2009 तक 8,209 रुपये वेतन प्राप्त किया। इसके बाद अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनका वेतन वापस ले लिया गया और अप्रैल 2009 से कलेक्टर दर पर भुगतान किया जाने लगा। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएँ दायर कीं। इसी दौरान विश्वविद्यालय द्वारा 19 फरवरी 2010 के आदेश के माध्यम से कर्मचारियों के नियमितीकरण को पूर्व प्रभाव से रद्द कर दिया गया। इस आदेश को भी याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को बड़ा झटका! (CG Samvida Karmchari Niyamitikaran)

Samvida Karmchari Niyamitikaran: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने 6 मार्च 2023 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा कि 19 फरवरी 2010 का आदेश विधिसंगत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय के नियमित कर्मचारी माने जाएंगे और उनका नियमितीकरण एक्ट 2009 की धारा 4(डी) के अंतर्गत सुरक्षित रहेगा। वे 26 अगस्त 2008 के आदेश के अनुसार सभी सेवा लाभ पाने के हकदार हैं। इसके साथ ही सभी रिट याचिकाएँ स्वीकार कर ली गईं। सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने रिट अपीलें दायर कीं, जिन्हें 21 जून 2023 को माननीय खंडपीठ ने खारिज कर दिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (सिविल) दायर की, जिसे 15 मई 2024 को खारिज कर दिया गया।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया। इस पर कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर की, जिस पर विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव और एमएचआरडी के सचिव को नोटिस जारी किया गया। विश्वविद्यालय ने एसएलपी खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की, जिसे भी न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिससे कर्मचारियों की नियमित सेवा पर अंतिम न्यायिक मुहर लग गई है।

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"गुरु घासीदास विश्वविद्यालय नियमितीकरण मामला" क्या है?

यह मामला गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 109 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित है। कर्मचारियों का नियमितीकरण 26 अगस्त 2008 के आदेश के आधार पर किया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे बाद में रद्द करने की कोशिश की थी।

"गुरु घासीदास विश्वविद्यालय नियमितीकरण मामला" में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर दी है और कर्मचारियों की नियमित सेवा को वैध मानते हुए उनका नियमितीकरण एक्ट 2009 की धारा 4(डी) के अंतर्गत सुरक्षित रखा।

"गुरु घासीदास विश्वविद्यालय नियमितीकरण मामला" का असर कर्मचारियों पर क्या होगा?

अब 109 कर्मचारियों को उनके नियमित कर्मचारी के अधिकार और सभी सेवा लाभ प्राप्त होंगे, और उनके नियमितीकरण पर अंतिम न्यायिक मुहर लग चुकी है।