Vande Bharat IBC24 News: जो विपक्ष न कर पाया, वो Gen-Z ने कर दिखाया.. पेपर लीक के 74 दिनों बाद झुकी सरकार, धर्मेंद्र के इस्तीफे के साथ ख़त्म हुआ जंतर-मंतर पर बवाल..

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NEET पेपर लीक विवाद को लेकर 74 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन भी समाप्त हो गया।

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  • Publish Date - July 26, 2026 / 12:42 AM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 01:00 AM IST

Vande Bharat IBC24 News

HIGHLIGHTS
  • 74 दिनों बाद धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा।
  • NEET विवाद पर छात्र आंदोलन हुआ समाप्त।
  • इस्तीफे में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

नई दिल्ली: Gen-Z ने मोदी सरकार के 12 साल में वो कर दिया, जो अब तक विपक्ष नहीं कर पाया था। NEET पेपर लीक को लेकर करीब ढाई महीने तक चले आंदोलन के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे ही दिया। (Vande Bharat IBC24 News) जैसे ही नीट 2026 के पेपर लीक का खुलासा हुआ देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। युवा सड़कों पर उतरे लेकिन इस प्रदर्शन में चिंगारी का काम किया। CJP ने जो 20 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई और आखिरकार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा।

पूरे घटनाक्रम को समझे सिलसिलेवार

कहानी शुरू होती है 12 मई से। जब NEET पेपर लीक का खुलासा हुआ। इसके बाद देशभर में छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा। फिर 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। धीरे-धीरे ये आंदोलन राष्ट्रीय मुद्दा बन गया और देश के अलग-अलग शहरों से छात्र इसमें शामिल होने लगे। आंदोलन लगातार चलता रहा। सरकार पर दबाव बढ़ता गया और आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया यानी पेपर लीक के खुलासे से लेकर इस्तीफे तक पूरे 74 दिन लगे और सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में ये पहला मौका था जब विरोध-प्रदर्शन के दबाव में किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा आया हो।

इस्तीफे में क्या लिखा प्रधान ने?

प्रधान ने लिखा, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं.. मेरा सदैव विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है.. पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है.. मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है.. देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे.. हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें.. (Vande Bharat IBC24 News) मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.. देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखूंगा..

अपने दो पन्नों के इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NEET परीक्षा में हुई अनियमितता की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उन्होंने पद छोड़ा है। उन्होंने लिखा कि सरकार ने तुरंत जांच CBI को सौंपी, दोबारा परीक्षा कराई और 20 लाख से ज्यादा छात्रों की परीक्षा सफलतापूर्वक कराई। (Vande Bharat IBC24 News) प्रधान ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वे बेहद आहत हैं, कुछ लोगों ने युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की, लेकिन छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद में न उलझे इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री और अपने सहयोगियों का आभार भी व्यक्त किया।

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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया?

उत्तर: उन्होंने NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया।

छात्र आंदोलन कितने दिनों तक चला?

उत्तर: जंतर-मंतर पर आंदोलन 37 दिन चला, जबकि पेपर लीक से इस्तीफे तक 74 दिन का घटनाक्रम रहा।

इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

उत्तर: उन्होंने छात्रों के भविष्य को सर्वोपरि बताते हुए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और शिक्षा सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।