No Insurance No Fuel Policy || Image- ibc24 news archive file
नई दिल्ली: देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के चलने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ (No Insurance No Fuel Policy) योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि भारत में करीब 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। यह सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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न्यायमूर्ति संजय करोल और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा की अवधि भी बढ़ा दी है। अब नई कारों के लिए 4 वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए 6 वर्ष का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य होगा। इससे पहले यह अवधि 3 वर्ष और 5 वर्ष थी।
सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में लगभग 30 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के हैं। (No Insurance No Fuel Policy) अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड पार्टी बीमा का मकसद केवल दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से भी बचाना है।
अदालत ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें केवल उन्हीं वाहनों को पेट्रोल या डीजल मिले, जिनका बीमा वैध हो। कोर्ट का मानना है कि इससे वाहन मालिक समय पर बीमा का नवीनीकरण कराएंगे और बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान भी आसान होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईवे और सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरों को वाहन पोर्टल और बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाए। साथ ही पेट्रोल पंपों पर वाहन का बीमा जांचने की व्यवस्था विकसित की जाए। (No Insurance No Fuel Policy) पुलिसकर्मियों को ऐसे मोबाइल ऐप या उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे मौके पर ही बीमा की जांच कर चालान जारी कर सकें।
अदालत ने मोटर बीमा को सरल बनाने के लिए चार स्तर की व्यवस्था का समर्थन किया है। इसमें अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा के अलावा यात्रियों की कानूनी जिम्मेदारी, मालिक व यात्रियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और वाहन क्षति बीमा को वैकल्पिक रूप से शामिल करने का सुझाव दिया गया है। बीमा कंपनियों को ग्राहकों को सरल भाषा में जानकारी देने और अतिरिक्त कवर चुनने का विकल्प देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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यह मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वह अपने बीमित वाहन में यात्रा कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मृतक के परिजनों को 10,00,500 रुपये मुआवजा और 7.5 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश सही माना। (No Insurance No Fuel Policy) अदालत ने कहा कि व्यापक मोटर बीमा पॉलिसी में वाहन मालिक भी शामिल होता है, इसलिए ऐसे मामलों में अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
No insurance, no fuel: Supreme Court proposes linking fuel supply with vehicle insurance
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— Bar and Bench (@barandbench) August 4, 2026
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