शह मात The Big Debate: अब हाईकोर्ट ने उठाया सवाल.. क्या छात्रसंघ चुनाव इस साल? ABVP और NSUI ने खोला मोर्चा, भाजपा-कांग्रेस के नेताओं को आखिर चुनाव से क्यों डर?

अब हाईकोर्ट ने उठाया सवाल.. क्या छात्रसंघ चुनाव इस साल? Order to Declare Clear Date of Student Union Elections

शह मात The Big Debate: अब हाईकोर्ट ने उठाया सवाल.. क्या छात्रसंघ चुनाव इस साल? ABVP और NSUI ने खोला मोर्चा, भाजपा-कांग्रेस के नेताओं को आखिर चुनाव से क्यों डर?
Modified Date: July 16, 2026 / 11:59 pm IST
Published Date: July 16, 2026 11:59 pm IST

भोपालः Student Union Elections मध्यप्रदेश में पिछले कई सालों से छात्रसंघ चुनाव पर बैन को लेकर एमपी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को दो हफ्ते के भीतर नया शैक्षणिक कैलेंडर पेश करने और छात्रसंघ चुनाव की स्पष्ट तारीख घोषित करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि यदि छात्रसंघ चुनाव ही नहीं कराए जाएंगे, तो भविष्य के जनप्रतिनिधि और नेतृत्वकर्ता कहां से तैयार होंगे? कोर्ट ने साफ कहा कि बहाने नहीं, छात्रसंघ चुनाव की तारीख बताइए। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद छात्र संगठनों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

Student Union Elections दरअसल, एमपी में साल 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। सरकारें कोई ना कोई बहाना बनाकर छात्रसंघ चुनाव को टालती रही हैं। यही वजह है कि छात्र संगठन अब सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इधर छात्रसंघ चुनाव से कतराने वाली कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां वार-पलटवार की नूराकुश्ती करती नजर आ रही हैं। कुल मिलाकर केंद्र से लेकर राज्य सरकारों के तमाम दिग्गज नेता जिस छात्रसंघ के जरिए ही सत्ता की दहलीज तक पहुंचे, उस पर उन्होंने फुल स्टॉप लगा दिया। ऐसे में सवाल ये कि-क्या ये मध्यप्रदेश के लाखों स्टूडेंट्स के साथ अन्याय नहीं है? सवाल ये कि क्या ये नई पीढ़ी को सीधे-सीधे राजनीति से काटने की साजिश नहीं है? सवाल ये कि छात्रसंघ चुुनाव के खिलाफ क्या बीजेपी और कांग्रेस में अघोषित जुगलबंदी है? सवाल ये कि क्या नेतापुत्रों की पैरासूट लैंडिंग के चलते छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं? सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव होंगे, याकि बहानेबाजी वाली पॉलिटिक्स जारी रहेगी?

इन्हें भी पढ़ें:-

 


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।