PM Modi on Oil CrisisPhoto Creadit: Social Media
PM Modi on Oil Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजस्थान के जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही राजस्थान को कई नए प्रोजेक्ट्स की सौगात दी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हुए युद्ध का असर भारत समेत कई देशों में देखने को मिला। इस युद्ध की वजह से आज बड़े-बड़े देश ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लेते हुए संकट का समय रहते सही आकलन किया और प्रभावी रणनीति बनाई। संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया। तब जाकर भारत इस संकट से उबर पाया।
पीएम मोदी ने कहा कि कहा कि भारत ने समय रहते सही रणनीति अपनाकर इस संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया और देश में ईंधन की कोई बड़ी किल्लत नहीं होने दी। पीएम ने कहा कि कई इलाकों में ईंधन की सप्लाई की थोड़ी समस्या हुई, लेकिन कहीं कोई किल्लत पैदा नहीं होने दी गई। पीएम ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच ही तेल कंपनियों को डीजल और पेट्रोल में करीब 75000 करोड़ रुपये का नुक्सान उठाना पड़ा था। इतनी रकम में एक नई रिफाइनरी बन जाए, लेकिन इस घाटे को पूरा करने के लिए हमने प्रति लीटर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी भी कम की। जिससे आम जनता पर बहुत ज्यादा बोझ नहीं पड़े।
उन्होंने कहा कि युद्ध के इस समय में भारत की दूसरे देशों के साथ जो दोस्ती बहुत काम आई। इस ईंधन संकट के शुरू होने से पहले भारत 25-26 देशों से ही ईंधन का आयात करता था। लेकिन संकट के समय दूसरे देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध बहुत काम आए। युद्ध के दौरान ही भारत 40 से ज्यादा देशों से ईंधन मंगाने लगा। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारे लिए राष्ट्र हित और राष्ट्र के नागरिकों का हित सर्वोपरि है। नागरिक देवो भव के मंत्र से हमने काम किया।
राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य के विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम से जुड़े। उन सभी को मैं प्रणाम करता हूं। उन्होंने कहा कि इस रण के कण कण ने हमें स्वाभिमान को सर्वोपरि रखने की सीख दी है। देश और व्यक्ति का स्वाभिमान तभी ऊपर रह सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो, दूसरों पर कम से कम निर्भर हो। राजस्थान की धरती से विकसित होने और आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आज का दिन साक्षी है कि भाजपा सरकारें परियोजनाओं को सिर्फ शिलान्यास करके नहीं छोड़ती बल्कि हम उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी दिन रात एक कर देते हैं।
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