शह मात The Big Debate: अधिकारियों पर वार.. धमकी बार-बार! छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स! क्या सियासी दबाव के बीच काम कर रहे हैं प्रदेश के अफसर?

अधिकारियों पर वार.. धमकी बार-बार! छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स! Pressure Politics of Congress in Chhattisgarh

शह मात The Big Debate: अधिकारियों पर वार.. धमकी बार-बार! छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स! क्या सियासी दबाव के बीच काम कर रहे हैं प्रदेश के अफसर?
Modified Date: August 20, 2026 / 11:35 pm IST
Published Date: August 20, 2026 11:35 pm IST

रायपुरः CG News छत्तीसगढ़ में इन दिनों धमकी पॉलिटिक्स को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों के बीच आरोप और सफाई से माहौल गर्माया हुआ है। ऐसा भी कई बार हुआ है, जब प्रशासनिक तंत्र की कसावट के लिए, सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने जनता की शिकायत पर खुले मंच से अफसरों को फटकार लगाई, लेकिन अब बीजेपी ने विपक्षी नेताओं पर अफसरों को धमकाने का आरोप लगाया है।

CG News ये 3 ऐसे मामले हैं जिन्हें लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दरअसल, अभनपुर नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है। नगर पालिका अध्यक्ष उत्तरसेन गहरवारे पर CMO और इंजीनियर के साथ गाली-गलौज और मारने की धमकी देने का आरोप है। इस पर बहस तब गर्माई जब घटना का CCTV फुटेज वायरल हो गया। इसमें पालिका अध्यक्ष अधिकारियों से कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें डंडा दिखाते नजर आ रहे हैं। गहरवारे कांग्रेस से जुड़े हैं सो बीजेपी ने इसे कांग्रेसियों का असल चेहरा बताते हुए घेरा। डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि छग कांग्रेस कोषाध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल पर कार्रवाई के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल ने ED को धमकाया, कांग्रेस नेता भी लगातार अधिकारियों को धमकाते रहे हैं, कांग्रेस ने अधिकारियों को धमकाकर गलत काम करवाए, जिसके चलते आज भी कई अफसर जेल में हैं। आरोप पर सफाई देते हुए PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि, ये सब क्यों और किन परिस्थियों में हुआ,इसकी जांच होना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ ED के एक्शन का विरोध कर, टीम पर जबरन दबाव बनाने का प्रयास किया गया। वैसे इससे पहले भी जांच ऐजेंसियों, प्रशासनिक अफसरों और पुलिस अधिकारियों के साथ नेताओं की बहस और खुलेआम धमकाने जैसे मामले सामने आ चुके हैं। सवाल ये है कि ऐसे हालात बार-बार क्यों बनते हैं, क्या वाकई विपक्षी नेताओं की फितरत है, क्यों नेता भाषा और मर्यादा का दायरा लांघते हैं?

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।