बीजेपी की जगह RSS पर निशाना, कितना कामयाब है कांग्रेस इस रणनीति में…?

Ads

पिछले कुछ दिनों में विपक्ष ने प्रदेश के कई ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर मोर्चा खोला है...महंगाई, बेरोजगारी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक कांग्रेस ने

  •  
  • Publish Date - September 8, 2021 / 11:22 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:46 PM IST

भोपाल। पिछले कुछ दिनों में विपक्ष ने प्रदेश के कई ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर मोर्चा खोला है…महंगाई, बेरोजगारी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर विरोध किया है…लेकिन इसके साथ ही प्रदेश में बिगड़ते माहौल, मारपीट की घटनाओं और सरकार के नीतिगत निर्णय के मुद्दों पर कांग्रेस के निशाने पर सरकार से पहले…संघ पर हमला बोला है…बीते कुछ दिनों से कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के टार्गेट पर भाजपा से ज्यादा संघ रहा है…क्या रणनीति है इसके पीछे….कितना कामयाब है कांग्रेस इस रणनीति में…?

ये भी पढ़ें: नेपाल के विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल ने संसद का सत्र बाधित किया, 14 सांसदों को निलंबित करने की मांग की

मध्यप्रदेश की सियासत में विपक्ष के निशाने पर सत्तारूढ़ बीजेपी कम और संघ ज्यादा है.. इंदौर-उज्जैन में मारपीट का मामला हो…MBBS के छात्रों को संघ का पाठ पढ़ाने का फैसला हो…एमपी में कुलपति के नाम को कुलगुरु करना हो या फिर खरगोन में पुलिस कस्ट़डी में आदिवासी युवक की मौत का मामला हो…कांग्रेस नेताओं ने सरकार के बजाए RSS को इसकी वजह बताया…पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो यहां कह डाला कि देश में जो माहौल खराब हो रहा है…इसका जिम्मेदार सिर्फ संघ है..इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने चुनौती तक दे डाली कि संघ प्रमुख एक मंच पर आ जाएं तो सबूत भी दे देंगे..

ये भी पढ़ें:रिफाइनरी, उर्वरक संयंत्रों के लिये हरित हाइड्रोजन खरीद बाध्यता प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजा: सिंह

दिग्विजय सिंह पहले भी कई मंचों से ये दावा कर चुके हैं कि संघ देश में नफरत फैलाने का काम कर रहा है..कांग्रेस नेता संघ पर बयानबाजी करे और बीजेपी चुप रहे.. ऐसा कभी हो सकता है क्या… तो दिग्विजय सिंह को जवाब मैदान में उतरे शिवराज सरकार के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा.. उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि वे जब भी बोलेंगे दुर्भावना ही फैलेगी..अफगानिस्तान और पाकिस्तान में संघ नहीं है फिर वहां का माहौल क्यों बिगड़ा हुआ है..

ये भी पढ़ें:केरल के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण की खिलाफत की

ये पहली बार नहीं है कि…कांग्रेस नेताओं ने संघ पर सवाल खड़े किये हो…दरअसल कांग्रेस जानती है कि सत्तारूढ़ बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत संघ है…कांग्रेस ने तो 2018 विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में कह दिया था की सरकार बनने पर शासकीय परिसरों में संघ की शाखाएं लगाने पर प्रतिबंध लगेगा और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के शाखाओं में जाने की छूट संबंधी आदेश को निरस्त किया जाएगा…लेकिन सत्ता में आने के बाद भी कांग्रेस ये कर नहीं पाई..अब सवाल ये है कि..बीजेपी की जगह RSS को निशाना बनाने से कांग्रेस को कितना फायदा होगा.?