(8th Pay Commission Latest Updates/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 8th Pay Commission Latest Updates: 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण डेडलाइन आज समाप्त हो रही है। कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों को अपनी मांगें और सुझाव आयोग के पास 15 जून 2026 की रात 12 बजे तक भेजने होंगे। आयोग पहले कई बार इस तारीख को आगे बढ़ा चुका है। लेकिन इस बार समयसीमा बढ़ने की संभावना बहुत ही कम मानी जा रही है। ऐसे में सभी संबंधित संगठनों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है।
वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मांगों और प्रस्तावों को केवल निर्धारित प्रारूप में ही स्वीकार किया जाएगा। आयोग के अनुसार पीडीएफ फाइल, फिजिकल ईमेल या हार्ड कॉपी के रूप में भेजे गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी संगठनों को आयोग द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करते हुए अपना मेमोरेंडम जमा करना होगा। इससे आयोग को सभी प्रस्तावों की व्यवस्थित तरीके से समीक्षा करने में आसानी होगी।
कर्मचारी संगठनों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने न्यूनतम बेसिक पे 52,600 रुपये करने का सुझाव दिया है। वहीं कई अन्य कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 2.92 से बढ़ाकर 3.50 करने की मांग की है। यदि सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
8वें वेतन आयोग विभिन्न राज्यों में बैठकों का आयोजन कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के विचार लिए जा रहे हैं। आयोग की अगली बैठक 22 और 23 जून को लखनऊ में होगी। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर तथा 7 से 9 जुलाई के बीच कोलकाता में बैठक प्रस्तावित है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में भी आयोग की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में लगभग 21 महीने लगे थे। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में भी लंबा समय लग सकता है। सरकार ने इसका गठन पिछले वर्ष नवंबर में किया था और आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि 8वें वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा रहा है। ऐसे में जब भी इसकी सिफारिशें लागू होंगी, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 1 जनवरी 2026 से बकाया एरियर का लाभ मिलेगा। इस फैसले का असर करीब 1.1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा।