निवेशकों की नई पीढ़ी बदल रही भारत का संपत्ति सृजन परिदृश्यः ईवाई रिपोर्ट

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निवेशकों की नई पीढ़ी बदल रही भारत का संपत्ति सृजन परिदृश्यः ईवाई रिपोर्ट

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 06:42 PM IST

मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) युवा पेशेवरों, महिला निवेशकों, उद्यमियों, ईएसओपी लाभार्थियों तथा दूसरी एवं तीसरी श्रेणी के शहरों के डिजिटल रूप से सक्रिय उपभोक्ताओं की बढ़ती भागीदारी भारत के संपत्ति सृजन परिदृश्य को बदल रही है। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह आकलन पेश किया गया।

ईवाई इंडिया की निवेशक भागीदारी पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 30 वर्ष से कम उम्र के एनएसई-पंजीकृत निवेशकों की हिस्सेदारी जून, 2026 में बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 23 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, बी30 शहरों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 20 प्रतिशत थी।

ईवाई ने कहा, ‘‘नई पीढ़ी के निवेशक डिजिटल माध्यमों के अधिक अभ्यस्त, खुद निर्णय लेने वाले और प्रौद्योगिकी के जरिये निवेश करने में सहज हैं। हालांकि, बड़े वित्तीय फैसलों के समय वे भरोसा, पुष्टि और मार्गदर्शन भी चाहते हैं।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, अनुशासित निवेश की दिशा में एक सांस्कृतिक बदलाव भी देखा जा रहा है। म्यूचुअल फंड की कुल व्यक्तिगत प्रबंधन-अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) में एसआईपी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 के 19 प्रतिशत से बढ़कर अब 35 प्रतिशत हो गई है। यह नियमित और लक्ष्य-आधारित निवेश की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।

रिपोर्ट कहती है कि करीब 2.61 डॉलर के माइक्रो-एसआईपी से पहली बार निवेश करने वाले, दूरदराज के और ग्रामीण निवेशकों को निवेश के दायरे में लाने में मदद मिल रही है। वहीं, 2.5 लाख से अधिक ग्रामीण संपर्क केंद्रों पर साझेदारियों और डिजिटल मंच के बढ़ते इस्तेमाल से निवेश तक पहुंच और भरोसे से जुड़ी बाधाएं कम हो रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने वित्तीय समावेशन की लागत और पहुंच को बदलने में भूमिका निभाई है। आधार ने पहचान सत्यापन को आसान बनाया, यूपीआई ने भुगतान को व्यापक बनाया और अकाउंट एग्रीगेटर ने सुरक्षित डेटा साझा करने की नींव रखी।

ईवाई इंडिया के राष्ट्रीय वित्तीय सेवा प्रमुख प्रतीक शाह ने कहा, ‘‘भारत की पहली वित्तीय क्रांति नागरिकों को वित्तीय प्रणाली से जोड़ने पर केंद्रित थी, जबकि अगला चरण परिवारों को संपत्ति सृजन से जोड़ने का होगा।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, 2035 तक 10 करोड़ से अधिक भारतीय दीर्घकालिक निवेश के दायरे में आ सकते हैं। इसमें छोटे शहरों, युवा निवेशकों, महिलाओं और डिजिटल रूप से जुड़े परिवारों की बढ़ती भागीदारी प्रमुख भूमिका निभा सकती है।

ईवाई इंडिया में संपत्ति प्रबंधन साझेदार विशाल माडिया ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, सहमति आधारित डेटा साझा करने, एआई आधारित विश्लेषण और बड़े पैमाने पर सलाह के मेल से निवेश को व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय