अल नीनो, बाढ़, सूखे के बावजूद खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं आएगीः चौहान

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अल नीनो, बाढ़, सूखे के बावजूद खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं आएगीः चौहान

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 05:51 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 05:51 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि अल नीनो और देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ एवं सूखे से जुड़ी चिंताओं के बावजूद 2026-27 फसल सत्र में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट आने की आशंका नहीं है।

चौहान ने रबी सत्र की तैयारियों पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने अप्रैल से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी थीं और अल नीनो की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्यों के साथ रबी फसलों की योजना पर चर्चा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि 2026-27 के लिए रबी खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 177.72 करोड़ टन रखा गया है, जबकि पिछले वर्ष वास्तविक उत्पादन 174.51 करोड़ टन रहा था। रबी सत्र की प्रमुख फसल गेहूं है।

चौहान ने कहा कि कुछ खरीफ फसलों का रकबा घटा है, लेकिन बुवाई का कुल रकबा पिछले साल के लगभग बराबर है। फिलहाल करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है जबकि बारिश में कमी 20 प्रतिशत से अधिक होने पर ही सूखे की स्थिति मानी जाती है।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस स्तर की कमी से खाद्यान्न उत्पादन पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि खरीफ उत्पादन का अंतिम अनुमान जल्द जारी किया जाएगा।

सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 196.21 करोड़ टन रखा है, जबकि पिछले साल वास्तविक उत्पादन 174.14 करोड़ टन रहा था।

खरीफ फसलों में से धान के रकबे में सबसे अधिक करीब 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मक्का, सोयाबीन और कपास का रकबा भी घटा है, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर का रकबा बढ़ा है। चौहान ने कहा कि यह दलहन और मोटे अनाज की तरफ लोगों के बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती का रकबा कम होने की सूचना है। इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है। नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

अल नीनो के 2026 के अंत तक ‘बहुत मजबूत’ होने के वैश्विक अनुमानों पर चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बोई जाने वाली फसलों और किस्मों को लेकर राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा कर रही है। बारिश, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी में क्षेत्रीय अंतर के आधार पर फसल योजना में बदलाव किया जा रहा है और सूखे की स्थिति वाले क्षेत्रों में आकस्मिक उपाय किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि बारिश में करीब 12 प्रतिशत कमी होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है और दिक्कतें कुछ खास क्षेत्रों तक सीमित हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र के अलावा आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना तथा राजस्थान के कुछ हिस्सों में चिंता जताई गई है। राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आने का इंतजार है।

चौहान ने कहा कि कर्नाटक के अनुरोध पर तीन अक्टूबर को केंद्रीय दल वहां जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी केंद्रीय आकलन दल भेजने का अनुरोध किया है।

चौहान ने कहा, ‘तत्काल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि भूमि खाली न रहे। केंद्र राज्यों को कम पानी एवं कम अवधि में तैयार होने वाली और स्थानीय मिट्टी एवं मौसम के अनुकूल बीज तथा फसल किस्मों की पहचान में मदद करेगा।’

उर्वरकों के बारे में कृषि मंत्री ने कहा कि कुछ उर्वरकों की कीमतों में लगभग दोगुने तक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद इनकी पर्याप्त उपलब्धता है। राज्यों की मांग के आधार पर 2026-27 के लिए कुल 380 लाख टन उर्वरक की जरूरत आंकी गई है। मौजूदा शुरुआती भंडार 163 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल के रबी सत्र की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी अधिक है।

चौहान ने कहा कि वायु प्रदूषण के लिए अकेले किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की प्रदूषण में कुछ भूमिका होती है लेकिन इसे प्रदूषण का मुख्य कारण बताना और इसके आधार पर किसानों को परेशान करना गलत है।

इस मौके पर कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एवं रामनाथ ठाकुर, कृषि सचिव अतीश चंद्र तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम. एल. जाट भी मौजूद थे।

भाषा प्रेम

प्रेम पाण्डेय

पाण्डेय