शिमला, चार अगस्त (भाषा) हिमाचल प्रदेश में ‘एचपी शिवा’ परियोजना के तहत करीब 4,000 हेक्टेयर भूमि को उच्च घनत्व वाले बागों में बदला जा रहा है, जिससे लगभग 3,500 किसानों को लाभ होगा। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
एशियाई विकास बैंक से वित्तपोषित इस परियोजना का उद्देश्य हिमाचल के कम ऊंचाई वाले जिलों में उपोष्ण-कटिबंधीय फलों का उत्पादन बढ़ाना, सिंचाई में सुधार करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इसके तहत पारंपरिक सेब की खेती से हटकर नींबू-वर्गीय फल, अमरूद, लीची, अनार, आलूबुखारा और पर्सिमोन जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
परियोजना का दायरा बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना जिलों में 6,000–10,000 हेक्टेयर क्षेत्र तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि पिछले तीन वर्षों में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। करीब 16 करोड़ रुपये के निवेश से 1.89 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस विकसित किए गए, जिससे लगभग 900 किसानों को लाभ मिला।
इसके अलावा, एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 870 हेक्टेयर क्षेत्र को बागवानी, संकर सब्जियों और मसालों की खेती में शामिल किया गया है, जिससे करीब 300 किसानों को फायदा हुआ।
एक अधिकारी ने कहा कि ओलावृष्टि से फसलों को सुरक्षित रखने के लिए 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र को ‘एंटी-हेल’ जाल से कवर किया गया और 6,454 किसानों को 44 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं, 12,739 किसानों को कृषि उपकरणों पर सब्सिडी प्रदान की गई।
बयान के मुताबिक, माइक्रो-सिंचाई के तहत 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल कर 2,185 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। साथ ही, 4.24 करोड़ रुपये के निवेश से 53 मशरूम उत्पादन एवं कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित की गईं, जिससे अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हुए हैं।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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