CG Dhan Kharidi New Rule: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के नियमों में बड़ा बदलाव.. अब ये संस्थाएं भी बेच सकेंगी अपनी उपज, क्या किसानों को होगा फायदा? जानें

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए जरूरी खबर, सरकार ने धान खरीदी के नियमों में किया बदलाव, Chhattisgarh Dhan Kharidi New Rule

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 05:51 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 05:51 PM IST

रायपुर। Dhan Kharidi New Rule छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से धान खरीदी की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब मठ-मंदिरों, न्यासों और धार्मिक संस्थाओं की जमीनों का भी एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन किया जा सकेगा। इसके जरिए इन संस्थाओं का पंजीयन संस्थागत कृषक के रूप में होगा और उनकी जमीन पर उत्पादित धान को सहकारी समितियों के माध्यम से बेचने की सुविधा मिल सकेगी। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

Dhan Kharidi New Rule नई व्यवस्था के तहत मठ-मंदिरों और न्यासों की कृषि भूमि को धान खरीदी की मौजूदा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे धार्मिक एवं संस्थागत जमीनों पर होने वाली खेती के धान की बिक्री में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी और संबंधित संस्थाओं को कृषक उन्नति योजना का लाभ सीधे मिल सकेगा। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने फैसले का उद्देश्य मठ-मंदिरों को धान बेचने में सुविधा देना बताया है। दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर राजीव लोचन महाराज ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि इस विषय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से पहले चर्चा हो चुकी है।

नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

अब तक धान खरीदी व्यवस्था में मुख्य रूप से व्यक्तिगत किसानों का पंजीयन किया जाता रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मठ-मंदिरों, न्यासों और अन्य संबंधित संस्थाओं की कृषि भूमि का भी संस्थागत कृषक के तौर पर पंजीयन संभव होगा। इससे इन जमीनों पर उत्पादित धान को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहकारी समितियों में बेचने का रास्ता साफ होगा। हालांकि, सरकार इसे धान खरीदी की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल (Chhattisgarh Dhan Kharidi New Rule)

सरकार के फैसले के बाद इस पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार की नजर अब मठ-मंदिरों की जमीनों पर है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय ऐसी जमीनों के लिए पंजीयन की जरूरत नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं सरकार मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर भी उसी तरह की कार्रवाई तो नहीं करना चाहती, जैसा राम मंदिर के मामले को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। कांग्रेस के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव और पूर्व कृषि मंत्री एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार के फैसले को किसानों और संस्थागत कृषकों की सुविधा से जोड़कर देखा है।

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