अदाणी ने रेटिंग एजेंसियों से बुनियादी ढांचे के जोखिम के आकलन का दायरा बढ़ाने को कहा
अदाणी ने रेटिंग एजेंसियों से बुनियादी ढांचे के जोखिम के आकलन का दायरा बढ़ाने को कहा
मुंबई, 31 अगस्त (भाषा) उद्योगपति गौतम अदाणी ने सोमवार को भारत की साख निर्धारण एजेंसियों से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए व्यापक विश्लेषणात्मक ढांचा विकसित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक मॉडल ऐसे बड़े मंच के आर्थिक और रणनीतिक मूल्य को कम आंक सकते हैं, जो नए बाजार और औद्योगिक तंत्र तैयार करते हैं।
मुंबई में केयरएज समूह के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए अदाणी समूह के चेयरमैन ने कहा कि भारत को साख या रेटिंग के कम सख्त मानकों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे बुनियादी ढांचे का आकलन करने के लिए व्यापक नजरिये की जरूरत है, जिसका मूल्य किसी एक परिसंपत्ति के नकदी प्रवाह से आगे तक जाता है।
अदाणी ने कहा, ‘‘भारत को कम सख्त मानकों की जरूरत नहीं है। भारत को व्यापक नजरिये की जरूरत है।’’
उन्होंने केयरएज से एकीकृत मंच बुनियादी ढांचे के लिए दुनिया का पहला व्यापक साख आकलन ढांचा विकसित करने का आह्वान किया।
उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब भारत 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के तहत बंदरगाहों, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली पारेषण, डिजिटल बुनियादी ढांचे और विनिर्माण में निवेश तेज कर रहा है।
अदाणी ने कहा कि अलग-अलग परिसंपत्तियों और अनुमानित नकदी प्रवाह के आधार पर बने पारंपरिक साख आकलन मॉडल उस अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि को पूरी तरह पकड़ने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं, जो बुनियादी ढांचे की दूसरी परिसंपत्तियों से जुड़ने पर पैदा होती हैं।
उन्होंने बुनियादी ढांचे को तीन श्रेणियों में बांटा। पहली ‘प्रतिस्थापन बुनियादी ढांचा’ है, जहां पारंपरिक रेटिंग मॉडल आमतौर पर पर्याप्त होते हैं। दूसरी ‘वृद्धि बुनियादी ढांचा’ है, जहां मॉडल में पूरे तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को शामिल किया जाना चाहिए। तीसरी ‘मंच बुनियादी ढांचा’ है, जो उनके अनुसार पूरी तरह नई क्षमताएं, बाजार और औद्योगिक समूह तैयार कर सकता है।
अदाणी ने कहा, ‘‘मुंद्रा, विडिण्गम और खावड़ा जैसे मंच केवल मौजूदा मांग को पूरा नहीं करते। वे नई मांग पैदा करते हैं। वे नए तंत्र और नई क्षमताएं बनाते हैं।’’
उन्होंने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे की किसी परियोजना का मूल्य मूल परिसंपत्ति से कहीं आगे बढ़ सकता है।
अदाणी ने कहा कि मुंद्रा अब उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत का एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार है और इसके आसपास व्यापक बहु-माध्यम संपर्क तथा औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकसित हुआ है।
अदाणी ने कहा, ‘‘यदि हम केवल आज दिखाई देने वाली मांग के लिए निर्माण करेंगे, तो भारत हमेशा कल के अवसरों के लिए पीछे रह जाएगा।’’
उन्होंने केरल में विडिण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का भी उदाहरण दिया और कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान के बावजूद भारत वर्षों तक माल के पुनः हस्तांतरण के लिए विदेशी केंद्रों पर निर्भर रहा।
अदाणी पोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2024 में चालू किया गया विडिण्गम भारत का पहला गहरे जल वाला बड़ा ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह है।
अदाणी ने कहा कि पारंपरिक वित्तीय आकलन इस परियोजना के व्यापक रणनीतिक मूल्य को समझने में कठिनाई महसूस करते रहे।
उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ा जोखिम कभी विडिण्गम का निर्माण करना नहीं था। सबसे बड़ा जोखिम यह था कि भारत यह मानता रहता कि वह ऐसा नहीं कर सकता।’’
अदाणी ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में खावड़ा में समूह की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का भी उल्लेख किया। अदाणी ग्रीन एनर्जी वहां करीब 538 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 30 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना विकसित कर रही है।
अदाणी ने कहा कि खावड़ा का आकलन केवल बिजली उत्पादन परियोजना के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। बड़े स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा.. डेटा केंद्रों, कृत्रिम मेधा (एआई), उन्नत विनिर्माण और अन्य अधिक ऊर्जा खपत वाले उद्योगों का आधार बन सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘एआई देखने में सॉफ्टवेयर हो सकता है। लेकिन अंततः एआई बुनियादी ढांचे पर चलता है।’’
उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग को समर्थन देने वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
अदाणी ने केयरएज समूह से ऐसे ढांचे को विकसित करने में नेतृत्व करने का आह्वान किया, जिसे आगे अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी अपना सकें।
अदाणी की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब भारत भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है। सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है और घरेलू विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
अदाणी ने कहा कि बुनियादी ढांचे की असली कसौटी केवल उसका वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि वह आर्थिक गतिविधि और राष्ट्रीय क्षमता है, जिसे वह संभव बनाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘2047 का भारत केवल महत्वाकांक्षा से नहीं बनेगा। वह तब बनेगा जब महत्वाकांक्षा भरोसा अर्जित करेगी, भरोसा पूंजी को आगे लाएगा और पूंजी राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण करेगी।’’
भाषा योगेश अजय
अजय

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