सुभाष चंद्रा ने कर्ज चुकाने पर दिया जोर, अंबानी पर लगाए आरोपों का नहीं किया जिक्र
सुभाष चंद्रा ने कर्ज चुकाने पर दिया जोर, अंबानी पर लगाए आरोपों का नहीं किया जिक्र
(फाइल तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर संबंधित मीडिया प्रतिष्ठानों के जरिये अभियान चलाने का आरोप लगाने के दो दिन बाद एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा ने सोमवार को इन आरोपों का आगे कोई जिक्र नहीं किया। इसकी जगह उन्होंने कर्जदारों का बकाया चुकाने और अपनी व्यक्तिगत दिवाला समाधान योजना का बचाव करने पर जोर दिया।
चंद्रा ने सोशल मीडिया मंच ‘इंस्टाग्राम’ पर अपने फॉलोअर्स के साथ करीब 18 मिनट चली बातचीत में कहा कि एस्सेल समूह से जुड़े कर्जदारों ने ऋणदाताओं का बकाया चुकाने पर सहमति जताई है।
उनका यह बयान राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मंजूर उस समाधान योजना पर उठ रहे सवालों के बीच आया है, जिसके तहत करीब 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले उनकी व्यक्तिगत संपत्ति से ऋणदाताओं को करीब 6.25 करोड़ रुपये की वसूली होगी। प्रक्रियागत खर्च के लिए 25 लाख रुपये अलग से दिए जाएंगे।
एस्सेल समूह के संस्थापक चंद्रा ने शुक्रवार को अंबानी का सीधे नाम लेते हुए रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों टीवी18 और सीएनबीसी-टीवी18 पर उनकी दिवाला कार्यवाही के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि उसके मीडिया ब्रांड का इस्तेमाल कभी किसी के खिलाफ हमला करने के लिए नहीं किया गया।
हालांकि, सोमवार को चंद्रा ने अपने इन आरोपों को आगे नहीं बढ़ाया। उनकी कंपनी ने रुख में आए इस बदलाव और अंबानी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने के संबंध में भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
चंद्रा ने इंस्टाग्राम पर कहा कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि को गलत तरीके से समझा गया है। यह राशि उन कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज से जुड़े दावों को दर्शाती है, जिनके ऋण के लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, न कि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज को।
उन्होंने कहा कि रविवार को उन्होंने संबंधित कर्जदारों से मुलाकात की और उन्होंने अपना बकाया चुकाने पर सहमति जताई। चंद्रा के मुताबिक, इन कर्जदारों की संख्या करीब 85 है और वे अलग-अलग स्तर पर एस्सेल समूह से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित बैंकों का कुल बकाया करीब 990 करोड़ रुपये है।
हालांकि, एनसीएलटी की कार्यवाही में मुद्दा इन कंपनियों का मूल कर्ज नहीं, बल्कि व्यक्तिगत गारंटर के रूप में चंद्रा की देनदारी है। मंजूर समाधान योजना से कर्जदार कंपनियों का ऋणदाताओं के प्रति बकाया खत्म नहीं होता। ऋणदाता उनकी उपलब्ध संपत्तियों और अन्य गारंटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।
चंद्रा ने कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के समय उनकी कुल संपत्ति करीब 39 करोड़ रुपये थी, जो बाद में करीब आठ करोड़ रुपये घट गई। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की आवासीय संपत्ति को अलग रखने के बाद समाधान पेशेवर ने उनकी उपलब्ध संपत्तियों का मूल्य करीब 6.79 करोड़ रुपये आंका है, जिसमें से वह 6.5 करोड़ रुपये देने को तैयार हैं।
चंद्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने 18 से 20 कर्जदार इकाइयों के लिए गारंटी दी थी और ये सभी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एस्सेल समूह से जुड़ी थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन गारंटियों के लिए हामी भरना शायद उनकी ‘सबसे बड़ी गलती’ थी और इसी वजह से वह मौजूदा स्थिति में पहुंचे हैं।
एनसीएलटी ने करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाली उनकी समाधान योजना को मंजूरी दी है। कुछ ऋणदाताओं ने कम वसूली पर आपत्ति जताते हुए उनकी संपत्तियों की अधिक जांच की मांग की है। एचडीएफसी बैंक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस समेत कई ऋणदाता एनसीएलटी के आदेश को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
विरोध करने वाले ऋणदाताओं ने एनसीएलटी में कहा था कि चंद्रा के परिवार से जुड़ी पांच इकाइयों के पास कुल मतदान अधिकारों का 61.78 प्रतिशत हिस्सा था और उन्होंने समाधान योजना को मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऋणदाताओं की समिति में योजना को 80.81 प्रतिशत मंजूरी मिली थी।
एनसीएलटी की पीठ के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा ने समाधान योजना के पक्ष में फैसला दिया था। अब मामला बहुमत की राय के अनुरूप औपचारिक आदेश के लिए मूल पीठ के पास जाएगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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