जोखिमों से निपटने के लिए एआई बुनियादी ढांचा मजबूत, स्व-विनियमित होना चाहिए: ट्राई चेयरमैन

जोखिमों से निपटने के लिए एआई बुनियादी ढांचा मजबूत, स्व-विनियमित होना चाहिए: ट्राई चेयरमैन

जोखिमों से निपटने के लिए एआई बुनियादी ढांचा मजबूत, स्व-विनियमित होना चाहिए: ट्राई चेयरमैन
Modified Date: January 12, 2026 / 08:10 pm IST
Published Date: January 12, 2026 8:10 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सोमवार को जोखिमों को कम करने लचीले एआई बुनियादी ढांचे और मजबूत स्व-विनियमन की वकालत की।

उन्होंने कहा कि प्रणाली को सुरक्षित, जवाबदेह और बाधाओं के प्रति अनुकूल बनाए रखने के लिए भी ऐसा करना जरूरी है।

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आगामी ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के लिए नैसकॉम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लाहोटी ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) बुनियादी ढांचे का डिजाइन और उसका क्रियान्वयन ही यह तय करेगा कि इस तकनीक के लाभ कुछ लोगों तक सीमित रहेंगे या विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से वितरित होंगे।

लाहोटी ने कहा, ”एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एआई बुनियादी ढांचे के भीतर लचीलापन बनाए रखना है। इसमें ऐसे सुरक्षा उपाय और ढांचे स्थापित करना शामिल है जो यह सुनिश्चित करें कि एआई प्रणाली बाधाओं के अनुकूल होने में सक्षम रहें और सार्वजनिक तथा आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए भरोसेमंद, सुरक्षित और जवाबदेह बने रहें।”

उन्होंने कहा कि नियामक लिहाज से इस क्षेत्र में मजबूत स्व-विनियमन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उद्योग को स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं और स्व-प्रमाणन के माध्यम से एआई के जोखिमों को सक्रिय रूप से दूर करने में सक्षम बनाएगा।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2035 तक भारत की कुल ऊर्जा मांग सालाना लगभग तीन प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने डिजिटल विकास को बढ़ावा देने के साथ ही एआई की ऊर्जा मांगों को अनुकूलतम करने की आवश्यकता बतायी।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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