Korba Farmer Suicide Attempt Case: धान बेचने के लिए नहीं कटा टोकन तो नपे तहसीलदार और पटवारी, कलेक्टर ने लिया ये बड़ा एक्शन, किसान ने की थी खुदकुशी की कोशिश

किसानों को नहीं कटा टोकन तो नपे पटवारी, कलेक्टर ने लिया ये बड़ा एक्शऩ, Action on Korba Farmer Suicide Attempt Case

Korba Farmer Suicide Attempt Case: धान बेचने के लिए नहीं कटा टोकन तो नपे तहसीलदार और पटवारी, कलेक्टर ने लिया ये बड़ा एक्शन,  किसान ने की थी खुदकुशी की कोशिश
Modified Date: January 13, 2026 / 12:06 am IST
Published Date: January 12, 2026 10:21 pm IST

रायपुर: Korba Farmer Suicide Attempt Case धान बिक्री के लिए टोकन नहीं मिलने से परेशान किसान द्वारा कीटनाशक पीने के मामले मेंरकार ने सख्त कार्रवाई की हैकलेक्टर कुणाल दुदावत ने लापरवाही बरतने पर कोरबा जिले के पटवारी हल्का क्रमांक 3 की पटवारी कामिनी कारे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया हैइस कार्य की मॉनिटरिंग में उदासीनता बरतने के कारण तहसीलदार हरदीबाजार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

Korba Farmer Suicide Attempt Case गौरतलब है कि जिला प्रशासन कोरबा को यह शिकायत मिली कि जिले के पटवारी हल्का क्रमांक 03, राजस्व निरीक्षक मंडल तिवरता, तहसील हरदीबाजार अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा, उड़ता एवं पूटा के कृषक उपार्जन केन्द्र में समर्थन मूल्य पर अपना धान विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पाली द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि संबंधित हल्का पटवारी द्वारा अनेक कृषकों का क्षेत्र निरीक्षण एवं सत्यापन नहीं किया गया है। इस लापरवाही के कारण प्रभावित कृषक अपना धान विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। पटवारी कारे के इस कृत्य को शासन के निर्देशों की अवहेलना एवं कर्तव्य के प्रति उदासीनता व स्वेच्छाचारिता मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पाली निर्धारित किया गया है।

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।