एटीएफ कीमतों पर सरकार से जल्द राहत देने की एयरलाइंस संगठन ने मांग रखी

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एटीएफ कीमतों पर सरकार से जल्द राहत देने की एयरलाइंस संगठन ने मांग रखी

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  • Publish Date - April 28, 2026 / 03:35 PM IST,
    Updated On - April 28, 2026 / 03:35 PM IST

मुंबई, 28 अप्रैल (भाषा) देश की प्रमुख विमानन कंपनियों ने एटीएफ कीमतों की वजह से विमानन उद्योग के ‘अत्यधिक दबाव’ में होने का जिक्र करते हुए कहा है कि तत्काल राहत नहीं दिए जाने पर संचालन ठप होने की भी स्थिति बन सकती है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागर विमानन मंत्रालय को पत्र लिखकर विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों, करों में राहत और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए समान मूल्य निर्धारण व्यवस्था की बहाली की मांग की है।

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की भागीदारी वाले इस संगठन ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जबकि कई क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र पाबंदियों ने परिचालन लागत और बढ़ा दी है।

विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा एटीएफ का ही होता है।

एफआईए ने 26 अप्रैल को लिखे पत्र में कहा, “किसी भी प्रकार के तदर्थ मूल्य निर्धारण (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय के बीच) या एटीएफ की कीमतों में अनुचित वृद्धि से एयरलाइंस को भारी नुकसान होगा और विमान खड़ा करने की नौबत आ सकती है, जिससे उड़ानें रद्द करनी पड़ेंगी।”

एयरलाइंस ने एटीएफ पर 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से स्थगित करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ईंधन की बढ़ी कीमतों और रुपये में गिरावट के कारण लागत और अधिक बढ़ गई है।

एयरलाइंस संगठन के मुताबिक, सरकार ने पिछले महीने घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी को 15 रुपये प्रति लीटर तक सीमित किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए कीमतों में 73 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो गई। इससे वैश्विक उड़ानों पर गंभीर असर पड़ा है और अप्रैल में भारी नुकसान हुआ है।

एफआईए के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संचालन के बीच असंतुलन पैदा कर दिया है, जिससे पूरा नेटवर्क अव्यावहारिक और अस्थिर हो गया है।

एयरलाइंस ने चेतावनी दी है कि मौजूदा मूल्य ढांचा यदि जारी रहा तो घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों का संचालन असंभव हो जाएगा और उद्योग गंभीर संकट में पहुंच सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण