सीआरजीओ पर डंपिंग रोधी शुल्क से बढ़ सकती है ट्रांसफॉर्मर लागत: जीटीआरआई

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सीआरजीओ पर डंपिंग रोधी शुल्क से बढ़ सकती है ट्रांसफॉर्मर लागत: जीटीआरआई

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 05:20 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 05:20 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) कोल्ड-रोल्ड ग्रेन-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिकल स्टील (सीआरजीओ) पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने का कोई भी कदम ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण लागत बढ़ा सकता है और देश के बिजली ग्रिड विस्तार की रफ्तार को धीमा कर सकता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने शुक्रवार को यह बात कही।

भारत अपनी घरेलू जरूरत का करीब 90 प्रतिशत सीआरजीओ आयात करता है।

वाणिज्य मंत्रालय की इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने जेएसडब्ल्यू जेएफई इलेक्ट्रिकल स्टील नासिक प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत के बाद चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और रूस से सीआरजीओ तथा अस्फटिक धातुओं (अमॉर्फस) के आयात की डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। 22 जून 2026 को शुरू हुई जांच के दायरे में एक अप्रैल, 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच हुआ आयात है। वहीं घरेलू उद्योग को हुई क्षति का आकलन 2022-23 से 2024-25 की अवधि के आधार पर किया जाएगा।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, हर बिजली और वितरण ट्रांसफॉर्मर के चुंबकीय कोर में सीआरजीओ स्टील का इस्तेमाल होता है।

यह विशेष प्रकार का इलेक्ट्रिकल स्टील ऊर्जा हानि को कम करता है और बिजली के कुशल पारेषण एवं वितरण के लिए अनिवार्य है।

जीटीआरआई के अनुसार, वर्ष 2032 तक बिजली ग्रिड विस्तार पर 9.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना के साथ सीआरजीओ की मांग में तेज वृद्धि होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत 1.91 लाख सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइन बिछाई जाएंगी और ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाकर 2,342 जीवीए (गीगावोल्ट-एम्पियर) से अधिक की जाएगी।

उसने कहा, ‘‘इसके बावजूद भारत अब भी आयात पर अत्यधिक निर्भर है।’’

देश में सीआरजीओ की वार्षिक खपत चार लाख से साढ़े चार लाख टन के बीच आंकी जाती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 40,000-50,000 टन है। भारत की लगभग 90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है, जिसमें मुख्य रूप से चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और रूस से आपूर्ति होती है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ जांच शुरू होने के इस कदम ने चिंता बढ़ा दी है कि जिस उत्पाद के लिए भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है, उस पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने से ट्रांसफॉर्मर की लागत बढ़ सकती है और देश की महत्वाकांक्षी बिजली ग्रिड विस्तार योजना की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।’’

उन्होंने कहा कि जब घरेलू उत्पादन देश की कुल मांग के 10वें हिस्से से भी कम है, तब ऊंचा शुल्क कीमतें तो बढ़ा सकता है, लेकिन आयात पर निर्भरता में कोई खास कमी नहीं आएगी। इससे पारेषण अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और बिजली वितरण में निवेश की गति प्रभावित हो सकती है।

जेएसडब्ल्यू जेएफई इलेक्ट्रिकल स्टील प्राइवेट लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई जेएस्क्वायर इलेक्ट्रिकल स्टील नासिक प्राइवेट लिमिटेड ने थिसेनक्रुप इलेक्ट्रिकल स्टील इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। यह कंपनी महाराष्ट्र के नासिक स्थित संयंत्र में ग्रेन-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिकल स्टील (जीओईएस) का विनिर्माण करती है।

जीटीआरआई ने कहा कि सीआरजीओ के आयात पर पहले से ही भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का अनिवार्य गुणवत्ता प्रमाणन लागू है।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘ आयातित प्रत्येक कॉयल को बिक्री से पहले भारतीय मानकों पर खरा उतरना होता है। इसलिए यह जांच उत्पाद की गुणवत्ता नहीं, बल्कि मूल्य निर्धारण से जुड़ा विवाद है। भारत की आयात निर्भरता को देखते हुए इस उत्पाद को पहले ही संरक्षण शुल्क से बाहर रखा गया था।’’

भाषा निहारिका रमण

रमण