डब्ल्यूटीओ सम्मेलन में भारत ने आधुनिक प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर चर्चा की मांग रखी

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डब्ल्यूटीओ सम्मेलन में भारत ने आधुनिक प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर चर्चा की मांग रखी

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 08:26 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 08:26 PM IST

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में उभरती और अल्प-विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के मुद्दे पर चर्चा शुरू करने की मांग करने के साथ कृषि वार्ताओं में गतिरोध दूर करने के लिए ‘नए संभावित तरीकों’ से बातचीत आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को बयान में कहा कि ये मुद्दे हाल ही में कैमरून में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी-14) के दौरान उठाए गए।

डब्ल्यूटीओ के शीर्ष निकाय की बैठक में भारत ने कहा कि प्रासंगिक और उन्नत प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण वैश्विक स्तर पर उत्पादकता एवं दक्षता बढ़ाता है और इससे विकासशील एवं अल्प-विकसित देशों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी मजबूत हो सकती है।

इस दौरान भारत ने डिजिटल क्षेत्र में डिजिटल असमानता, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और नियामकीय ढांचे पर ठोस काम का समर्थन किया, ताकि विकासशील देशों को इसका लाभ मिल सके।

हालांकि, मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान ई-कॉमर्स पर लगने वाले सीमा शुल्क के स्थगन के मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। यह मुद्दा अब जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की आम परिषद की अगली बैठक में उठाया जाएगा।

बयान के मुताबिक, भारत ने कृषि वार्ता पर कहा कि मौजूदा गतिरोध का कारण ‘विश्वास की कमी’ है, जिसे दूर करने के लिए पिछले मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में किए गए वादों को लागू करना जरूरी है। भारत ने कृषि उत्पादों के सार्वजनिक भंडारण और विशेष सुरक्षा तंत्र जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

भारत ने ‘ट्रिप्स’ समझौते के तहत ‘गैर-उल्लंघन एवं परिस्थिति शिकायतों’ (एनवीएससी) पर स्थगन बढ़ाने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। साथ ही, विशेष एवं अलग व्यवहार के प्रावधान को कमजोर न करने और इसे अधिक प्रभावी बनाने की बात कही।

इसके अलावा, भारत ने चीन-समर्थित निवेश सुविधा समझौते का विरोध करते हुए कहा कि इससे डब्ल्यूटीओ के मूल सिद्धांतों पर असर पड़ सकता है। भारत ने इसे संगठन के ढांचे में शामिल करने से भी इनकार किया।

इस बीच, अमेरिका ने ई-कॉमर्स शुल्क स्थगन को बढ़ाने पर सहमति न बनने पर निराशा जताई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि यदि डब्ल्यूटीओ इस प्रस्ताव पर निर्णय नहीं ले पाता है, तो अमेरिका इच्छुक देशों के साथ अलग व्यवस्था के तहत आगे बढ़ेगा।

यह सम्मेलन 30 मार्च को किसी सहमति के बगैर ही समाप्त हो गया। इसकी वजह यह है कि ब्राजील और तुर्किये जैसे कुछ देशों ने ई-कॉमर्स शुल्क स्थगन बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय