नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को वित्त वर्ष 2025-26 के शुद्ध लाभ में लगभग 25,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण (उपयोग समाप्त हो चुके वाहन) नियमावली 2025 के तहत वाहन विनिर्माताओं को अतीत में बेचे गए वाहनों के लिए पर्यावरण मुआवजे हेतु बजटीय प्रावधान करना होगा।
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जनवरी 2025 में अधिसूचित पर्यावरण संरक्षण (उपयोग समाप्त हो चुके वाहन) नियमावली, 2025 में एक साधारण दिखने वाले उपबंध ने वाहन विनिर्माताओं को उस समय डरा दिया, जब उनके ऑडिटरों ने इसके परिणामों की गंभीरता की ओर इशारा किया।
जनवरी 2025 की अधिसूचना का ”नियम 4 (6)” कहता है, ”यदि विनिर्माता अपना परिचालन बंद कर देता है, तो विनिर्माता को परिचालन बंद होने तक बाजार में पहले से उपलब्ध कराए गए वाहनों के संबंध में अपनी विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) का पालन करना होगा।”
एक उद्योग कार्यकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ”यह नियम लेखा मानक ‘इंड एएस AS 37- प्रावधान, आकस्मिक देनदारियां और आकस्मिक संपत्ति’ को सक्रिय करता है, जिसका अर्थ है कि वाहन विनिर्माताओं को पिछले 20 वर्षों में बेचे गए निजी वाहनों और 15 वर्षों में बेचे गए वाणिज्यिक वाहनों के लिए ईपीआर प्रमाणपत्रों की लागत हेतु पर्याप्त वित्तीय प्रावधान करने होंगे।”
एक अन्य उद्योग अधिकारी ने कहा, ”इस नियम के कारण ऑटो कंपनियों को अतीत में बेचे गए वाहनों के लिए ईपीआर के प्रावधान करने होंगे, भले ही उनका बाजार से बाहर निकलने का कोई इरादा न हो, जिससे धनराशि फंस जाएगी और मुनाफा प्रभावित होगा।”
यह समझा जाता है कि उद्योग निकाय सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने भी मंत्रालय के समक्ष इस मामले को उठाया था।
एक अन्य उद्योग कार्यकारी ने कहा, ”एक बार जब बहीखातों में प्रावधान हो जाएगा, तो यह पूरे वाहन उद्योग के लिए उस वर्ष के मुनाफे को काफी कम कर देगा।”
भाषा पाण्डेय
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