भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में वाहन उद्योग की अहम भूमिका : सियाम अध्यक्ष

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में वाहन उद्योग की अहम भूमिका : सियाम अध्यक्ष

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में वाहन उद्योग की अहम भूमिका : सियाम अध्यक्ष
Modified Date: September 3, 2026 / 05:25 pm IST
Published Date: September 3, 2026 5:25 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) वाहन उद्योग भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बना हुआ है। उद्योग ने सतत विकास, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

‘सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने उद्योग संगठन के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि वाहन क्षेत्र का भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल योगदान 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह देश के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में करीब 15 प्रतिशत का योगदान देता है।

चंद्रा ने कहा, “उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इसका संबंधित क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण व्यापक प्रभाव है और यह आपूर्ति श्रृंखला के एक बड़े नेटवर्क को समर्थन देता है।”

वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात में भी उद्योग के लगातार बेहतर प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “यात्री वाहन खंड में वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक की सबसे अधिक 46 लाख इकाइयों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है।”

उन्होंने कहा कि इस श्रेणी का निर्यात भी अबतक के उच्चतम स्तर 9.1 लाख इकाई पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.5 प्रतिशत अधिक है।

चंद्रा ने कहा कि दोपहिया वाहन खंड में वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू बिक्री अबतक के उच्चतम स्तर 2.17 करोड़ इकाई पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 में दोपहिया वाहनों का निर्यात 23.4 प्रतिशत बढ़कर 51.8 लाख इकाई रहा।’’

इसी तरह, चंद्रा ने कहा, “तिपहिया वाहन खंड में वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू बिक्री 8.4 लाख इकाइयों की रही, जो 12.8 प्रतिशत की वृद्धि है।”

उन्होंने कहा कि तिपहिया वाहनों का निर्यात भी पिछले वर्ष के 3.1 लाख से बढ़कर 4.6 लाख इकाइयों पर पहुंच गया, जो 50.1 प्रतिशत की वृद्धि है।

सियाम के अध्यक्ष ने कहा कि वाणिज्यिक वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में अबतक की सबसे अधिक 10.80 लाख इकाइयों की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो 12.6 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि इस दौरान निर्यात 17.4 प्रतिशत बढ़कर 95,000 इकाइयों पर पहुंच गया।

चंद्रा ने कहा, “इस वृद्धि के साथ उद्योग ने सतत विकास, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।”

उन्होंने साथ ही कहा कि समूचे वाहन उद्योग ने एक अप्रैल, 2025 से पूरी तरह ई20-अनुरूप पेट्रोल वाहन का विनिर्माण शुरू कर दिया है।

चंद्रा ने कहा, “उद्योग की यह पहल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के दृष्टिकोण को समर्थन देती है।”

उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत हाल के महीनों में कुछ मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) ने ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ वाहनों को बाजार में उतारा है और उनका प्रदर्शन भी किया है।

विद्युतीकरण के बारे में उन्होंने कहा कि 2025-26 में ज्यादातर वाहन खंड में नए वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहन की हिस्सेदारी लगातार दोहरे अंक में बढ़ी है। यात्री वाहन, दोपहिया और तिपहिया वाहनों में यह वृद्धि देखी गई।

चंद्रा ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 में देश में इलेक्ट्रिक वाहन का कुल पंजीकरण 25 लाख इकाइयों तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 19.7 लाख इकाई था। इस तरह इसमें 24.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।”

भाषा निहारिका अजय

अजय


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