बाई हीराबाई ट्रस्ट के न्यासी की पात्रता से जुड़ी शर्तों को बदलने की तैयारी: टाटा ट्रस्ट्स

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बाई हीराबाई ट्रस्ट के न्यासी की पात्रता से जुड़ी शर्तों को बदलने की तैयारी: टाटा ट्रस्ट्स

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  • Publish Date - April 19, 2026 / 01:52 PM IST,
    Updated On - April 19, 2026 / 01:52 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को कहा कि बाई हीराबाई ट्रस्ट के न्यासियों ने पात्रता मानदंडों में मौजूद प्रतिबंधात्मक प्रावधानों (जैसे गैर यहूदियों के ट्रस्टी बनने पर रोक) को बदलने के लिए उचित प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब कुछ दिन पहले टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को दी गई एक शिकायत में दिग्गज उद्योगपति वेणु श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह की बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन (बाई हीराबाई ट्रस्ट) के बोर्ड में नियुक्ति को चुनौती दी थी।

मिस्त्री ने दावा किया था कि श्रीनिवासन और सिंह ट्रस्ट डीड में निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, जिसमें पारसी जरथुस्त्री धर्म का पालन और मुंबई में निवास की विशिष्ट शर्तें शामिल हैं।

इस महीने की शुरुआत में टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने व्यावसायिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए बाई हीराबाई ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स प्रबंधन के अनुरोध पर पद छोड़ा था।

टाटा ट्रस्ट्स ने एक बयान में कहा कि बाई हीराबाई ट्रस्ट के न्यासियों के बोर्ड की बैठक 17 अप्रैल, 2026 को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में ट्रस्ट की गतिविधियों की समीक्षा के साथ ही मीडिया में ट्रस्ट से संबंधित हालिया बयानों पर चर्चा की गई।

बयान में कहा गया, ”ट्रस्टियों ने ट्रस्ट डीड की विसंगतियों को दूर करने और इसे टाटा ट्रस्ट्स के उन मूल्यों के अनुरूप बनाने के लिए, जिनका वह हमेशा प्रतीक रहा है, न्यासियों की पात्रता के संबंध में प्रतिबंधात्मक शर्तों को बदलने के लिए उचित प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया है।”

ट्रस्टियों ने इस बात पर जोर दिया कि टाटा की विचारधारा हमेशा समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और सर्वव्यापी रही है, जिसका ध्यान परोपकार और राष्ट्र सेवा पर केंद्रित है।

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा, ”भारत के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त कानूनी राय के बाद 2000 से गैर यहूदियों को लगातार ट्रस्ट में नियुक्त किया गया है। न्यासियों ने कहा कि बाई हीराबाई एक गैर-शेयरधारिता न्यास है, जिसका संपत्ति आधार और गतिविधियां सीमित हैं।”

भाषा पाण्डेय अजय

अजय