विदेशी मुद्रा प्रवासी जमा जुटाने से भुगतान संतुलन को मिला मजबूत समर्थन: सीईए नागेश्वरन
विदेशी मुद्रा प्रवासी जमा जुटाने से भुगतान संतुलन को मिला मजबूत समर्थन: सीईए नागेश्वरन
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के एफसीएनआर (बी) जमा सफलतापूर्वक जुटाए जाने से देश के भुगतान संतुलन को मजबूत समर्थन के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये को एक आधार मिला है।
आरबीआई ने आठ जून, 2026 को वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच देश की बाह्य क्षेत्र की स्थिति मजबूत करने और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) जमा, विदेशों से वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और अन्य विदेशी मुद्रा प्रवाह को शामिल करते हुए विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा शुरू की थी।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश को कुल 56.84 अरब डॉलर का प्रवाह मिला है, जिसमें 52.3 अरब डॉलर एफसीएनआर(बी) जमा के तहत आए हैं।
नागेश्वरन ने पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी होने के बाद बयान में कहा, ‘‘आरबीआई के एफसीएनआर जमा को सफलतापूर्वक जुटाया जाना भुगतान संतुलन को बहुत मजबूत समर्थन देता है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के लिए एक आधार भी प्रदान करता है।’’
अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का जिक्र करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि तिमाही आंकड़ों में दिखी मजबूती को महत्वपूर्ण आंकड़ों का भी समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने कहा, ‘‘निकट अवधि में देखा जाए तो घरेलू आर्थिक गतिविधियों की गति काफी मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। हमने अगस्त की आर्थिक समीक्षा में इसका जिक्र किया है। ब्याज दर का स्तर, ऊर्जा जिंस की आपूर्ति में संभावित बाधा और खाद्य कीमतों आदि को लेकर चिंताएं हैं।’’
नागेश्वरन ने कहा कि वैश्विक मामलों के संबंध में अभी कई मुद्दों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘उनका असर आने वाले समय में देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल घरेलू आर्थिक गतिविधियां और निर्यात प्रदर्शन दोनों ने मिलकर एक और तिमाही में मजबूत वृद्धि दर्ज कराने में योगदान दिया है। यह पिछले 12 वर्षों में लागू किए गए वृहद आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों के लाभकारी प्रभावों को भी दर्शाता है।’’
नागेश्वरन ने कहा कि देश अब बेहद अनिश्चित वैश्विक माहौल में इन संरचनात्मक सुधारों का लाभ उठा रहा है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों…प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक…ने जीडीपी वृद्धि में योगदान दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘…कृषि का योगदान कुछ कम रहा, लेकिन पश्चिम एशिया से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद पहली तिमाही में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा। इसका एक कारण सरकार का यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि युद्ध के कारण कच्चे माल की कोई कमी नहीं हो।’’
कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्यपालन क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 4.4 प्रतिशत थी।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रही। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान में युद्ध और उससे पैदा हुई वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
भाषा रमण अजय
अजय

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