नीति-निर्माताओं से सवाल नहीं करना वृद्धि के लिए ‘सबसे नुकसानदायक’: सुरजीत भल्ला

नीति-निर्माताओं से सवाल नहीं करना वृद्धि के लिए ‘सबसे नुकसानदायक’: सुरजीत भल्ला

नीति-निर्माताओं से सवाल नहीं करना वृद्धि के लिए ‘सबसे नुकसानदायक’: सुरजीत भल्ला
Modified Date: August 31, 2026 / 07:52 pm IST
Published Date: August 31, 2026 7:52 pm IST

मुंबई, 31 अगस्त (भाषा) अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने सोमवार को कहा कि नीतियां बनाने वालों से सवाल नहीं पूछने की भारतीय परंपरा आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचा रही है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में भी रह चुके भल्ला ने कहा कि भारत में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता है।

घरेलू ब्रोकरेज कंपनी एलारा सिक्योरिटीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘‘यह वृद्धि के लिए सबसे नुकसानदायक कारक है। क्योंकि हम लोकतंत्र हैं, इसलिए हमें सवाल पूछने की स्वतंत्रता है और हमें जवाब देने के लिए बाध्य होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि भारतीयों को नीति बनाने वालों के साथ-साथ उन उद्योगपतियों से भी सार्वजनिक रूप से सवाल पूछने चाहिए, जो नीतिगत फैसलों को प्रभावित करते हैं।

भल्ला ने सवाल किया, ‘‘जो उद्योगपति हमारी ज्यादातर नीतियों को दिशा देते हैं… क्या उनसे कभी सार्वजनिक मंच पर सवाल पूछे जाते हैं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपने किसी सरकारी अधिकारी, खासकर नीतियां बनाने वाले अधिकारी से कभी खुले मंच पर सवाल पूछे जाते देखा है?’’

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दे कुछ अखबारों में लिखे जाने वाले विचार लेखों तक ही सीमित रह जाते हैं।

जवाबदेही की पैरवी करते हुए भल्ला ने कहा कि जब हम सवाल पूछते हैं तो हमें जवाब मिलते हैं और तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।

भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को आर्थिक वृद्धि में बाधा बताने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए भल्ला ने माना कि चीन जैसे देशों के लिए ऐसा करना आसान है। हालांकि, उन्होंने तुरंत जोड़ा कि कई अन्य देश लोकतंत्र होते हुए भी अपनी वृद्धि की गति तेज करने में सफल रहे हैं।

भल्ला ने कहा कि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भारत को निवेश दर मौजूदा 28-30 प्रतिशत से बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 34 प्रतिशत पर करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा पहला लक्ष्य 34 प्रतिशत तक पहुंचना होना चाहिए।’’

उन्होंने इसे आर्थिक वृद्धि तेज करने का एक प्रमुख निर्धारक बताया।

भल्ला ने कहा कि भारत को लंबे समय से चली आ रही करीब 6-6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से आगे निकलने की जरूरत है। इसके लिए देश को शुल्क घटाकर और निवेश पर प्रतिफल कम करने वाली नीतिगत व्यवस्थाओं को हटाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘शुल्क बढ़ने से हमने मूल रूप से अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता कम कर दी है।’

उन्होंने कहा कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) ने निवेश की इच्छा या निवेश पर मिलने वाले प्रतिफल को और कम कर दिया है।

इसी कार्यक्रम में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि भारत को ‘‘जैसा चल रहा है, वैसा ही चलने’’ की नीति से हटकर अपनी औसत आर्थिक वृद्धि दर को करीब 8.7 प्रतिशत तक बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने विनिर्माण और विनिर्माण निर्यात को बढ़ाकर विश्व व्यापार में भारत के हिस्से को मौजूदा स्तर से कम से कम दोगुना और हो सके तो तीन गुना करने का भी आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि पूरे देश के लिए एक जैसी निर्यात प्रोत्साहन नीति काम नहीं करेगी और इसके बजाय हमारे पास राज्यों की व्यक्तिगत ताकत के आधार पर राज्य-विशिष्ट निर्यात प्रोत्साहन नीतियों की एक व्यवस्था होनी चाहिए।

भाषा योगेश अजय

अजय


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