ओएनजीसी साल के अंत तक कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों की ‘ट्रेडिंग’ में कदम रखेगी
ओएनजीसी साल के अंत तक कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों की ‘ट्रेडिंग’ में कदम रखेगी
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी इस साल के अंत तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ट्रेडिंग शुरू करने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करने के साथ अपने ऊर्जा कारोबार से अधिक मूल्य हासिल करना है।
ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरुण कुमार सिंह ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि कंपनी की प्रस्तावित ट्रेडिंग इकाई का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और साल के अंत तक इसका परिचालन शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि ट्रेडिंग इकाई शुरुआत में समूह की कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की जरूरतें पूरी करेगी और बाद में तीसरे पक्ष के लिए भी कारोबार करेगी। इसे दुबई या सिंगापुर में स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।
सिंह ने उम्मीद जताई कि कच्चे तेल की बेहतर खरीद, माल ढुलाई और जोखिम प्रबंधन के जरिये इस इकाई से सालाना करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर के अवसर पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इकाई के साझेदारों और उसकी मौजूदगी वाली जगह को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि एचपीसीएल, मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और ओएनजीसी द्वारा चुना जा रहा एक अंतरराष्ट्रीय कारोबारी साझेदार इस ट्रेडिंग उपक्रम में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) और ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) के साथ भी समन्वय करेगी। इससे ओएनजीसी समूह की वैश्विक तेल बाजार में एक साझा वाणिज्यिक व्यवस्था बन सकेगी।
ओएनजीसी सरकार के अनुरोध पर मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी बना रही है। कंपनी का निदेशक मंडल इस परियोजना को पहले ही मंजूरी दे चुका है। इससे भारत की समर्पित आपातकालीन कच्चे तेल भंडारण क्षमता मौजूदा 53.3 लाख टन से करीब एक-तिहाई बढ़ जाएगी।
सिंह ने कहा कि इस भंडार के निर्माण का खर्च ओएनजीसी खुद उठाएगी। इसकी आधी क्षमता रणनीतिक इस्तेमाल के लिए आरक्षित होगी, जबकि कंपनी ने बाकी क्षमता के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति मांगी है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत के मौजूदा रणनीतिक भंडार से करीब 9.5 दिन के शुद्ध तेल आयात की जरूरत पूरी हो सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के पास मौजूद कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार इसके अलावा करीब 64.5 दिन की जरूरत पूरी करता है।
सिंह ने कहा कि ट्रेडिंग और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बावजूद तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन ओएनजीसी की रणनीति का मुख्य आधार बना रहेगा।
कंपनी वर्ष 2031 तक गहरे समुद्र में 87 कुओं की खुदाई पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। सरकार की ओर से जुलाई में अपतटीय खोज को समर्थन देने के लिए पांच साल में 84,000 करोड़ रुपये देने के फैसले से ओएनजीसी पर महंगे गहरे समुद्री संसाधनों की खोज का वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है।
ओएनजीसी ‘प्रोजेक्ट डीपएक्स’ के तहत दो साल में गहरे समुद्री क्षेत्र में खुदाई गतिविधियां दोगुनी करने की योजना बना रही है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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