समृद्ध बिहार के लिए बैंकों का सहयोग जरूरी, अपेक्षित ऋण वितरण नहीं हो रहा : विजेंद्र यादव
समृद्ध बिहार के लिए बैंकों का सहयोग जरूरी, अपेक्षित ऋण वितरण नहीं हो रहा : विजेंद्र यादव
पटना, 22 सितंबर (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य समृद्ध बिहार के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए बैंकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
पटना में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 98वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यादव ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में वार्षिक ऋण लक्ष्य की तुलना में बैंकों की ऋण वितरण की रफ्तार काफी धीमी है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि 1,57,015 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले पहली तिमाही में केवल 19,611 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जो लक्ष्य का महज 12.49 प्रतिशत है।
उन्होंने राज्य के कम ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशो) पर भी बैंकों को आड़े हाथों लिया और चेतावनी दी कि जिन बैंकों का सीडी नहीं सुधरेगा, उन्हें राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं।
यादव ने कहा कि बैंक केवल आर्थिक गतिविधियों को गति नहीं देते, बल्कि समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों को भी मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बैठक को कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम सिंह तथा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के मुख्य महाप्रबंधक अनुराग जोशी ने भी संबोधित किया।
बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही तक वार्षिक साख योजना (एसीपी) की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र के ऋण, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), पीएम-एफएमई, मुद्रा योजना, पीएम-स्वनिधि, पीएम-विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर बिजली योजना जैसी प्रायोजित योजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।
इसके अलावा एमएसएमई, कृषि क्षेत्र, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), डिजिटल केसीसी और कृषि अवसंरचना कोष के तहत वित्तपोषण की स्थिति पर चर्चा हुई। पशुपालन, मत्स्य पालन तथा जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं के बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत वित्तपोषण पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में एनपीए, सरफेसी अधिनियम, नीलाम-पत्र वादों के त्वरित निष्पादन तथा ऋण वसूली से जुड़ी समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। साथ ही पीओएस मशीनों और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के विस्तार तथा वित्तीय साक्षरता केंद्रों और स्कूली पाठ्यक्रम के जरिये डिजिटल वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
बैठक में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के वित्तीय समावेशन, स्टार्टअप के लिए क्रेडिट गारंटी तथा बिना दावे वाली परिसंपत्तियों के शीघ्र निपटान की भी समीक्षा की गई। बैठक में कौशल विकास, व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ऋण पुनर्गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
भाषा कैलाश
जितेंद्र अजय
अजय

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