बैंक कारोबारों की जरूरतों के अनुरूप कर्ज विकल्प विकसित करें : सीतारमण
बैंक कारोबारों की जरूरतों के अनुरूप कर्ज विकल्प विकसित करें : सीतारमण
(तस्वीरों के साथ)
मुंबई, 25 मई (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकों से मानक ऋण उत्पादों से आगे बढ़कर ऐसे कर्ज विकल्प विकसित करने का आग्रह किया जिनकी अदायगी संबंधित कारोबार की जरूरतों एवं आय चक्र के अनुरूप हो।
सीतारमण ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि गैर-मानक कारोबार के लिए एक ही तरह के ऋण उत्पाद उपयुक्त नहीं हो सकते हैं और इस दिशा में सिडबी जैसे संस्थान अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मानक ऋण उत्पाद गैर-मानक कारोबार के लिए काम नहीं कर सकते।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न व्यवसायों की आय अलग-अलग समय और तरीके से होती है, जबकि अभी कर्ज की अदायगी आम तौर पर मासिक आधार पर तय होती है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कृषि से जुड़े उद्यमों की आय हर महीने नहीं होती, पर्यटन क्षेत्र में कमाई कुछ महीनों में केंद्रित रहती है, जबकि निर्यातकों को भुगतान में समय लगता है। ऐसे में सभी के लिए एक समान पुनर्भुगतान संरचना रखना उचित नहीं है।’’
उन्होंने सुझाव दिया कि नासिक, सतारा और सांगली जैसे क्षेत्रों में स्थित कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कर्ज अदायगी को फसल चक्र से जोड़ा जा सकता है। वहीं, महाबलेश्वर, माथेरान और लोनावला जैसे पर्यटन स्थलों में ऋण भुगतान को मौसमी आय के अनुरूप तय किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर कपड़ा और परिधान इकाइयों के लिए निर्यात चक्र को ध्यान में रखते हुए निर्यात-पूर्व एवं निर्यात-पश्चात वित्त के साथ मुद्रा जोखिम से सुरक्षा भी दी जानी चाहिए।
सीतारमण ने कहा, “सही उद्यम को सही समय पर और सही उद्देश्य के लिए सही ऋण उपलब्ध कराना होना चाहिए।”
उन्होंने सिडबी से केवल ऋणदाता के बजाय छोटे उद्यमों के लिए ‘बाजार निर्माता’ एवं जोखिम-साझेदार की भूमिका निभाने और स्टार्टअप कंपनियों की ऋण पूंजी जरूरतों को पूरा करने को भी कहा।
वित्त मंत्री ने कहा कि देश में लगभग 32 करोड़ लोग एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत हैं और इस क्षेत्र को सही कर्ज उपलब्ध कराने से व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
इस अवसर पर सिडबी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल ने कहा कि छोटे उद्यमों को ऋण मुहैया कराने वाली संस्था अगले दो वर्षों में उद्योग संगठनों के साथ अपनी भागीदारी 105 से बढ़ाकर 500 करने का लक्ष्य रख रही है।
वित्तीय सेवा विभाग के विशेष सचिव संजय लोहिया ने कहा कि सरकार इस वर्ष घोषित 5,000 करोड़ रुपये की पूंजी में से 3,000 करोड़ रुपये पहले ही सिडबी में निवेश कर चुकी है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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