विकसित भारत 2047 में बिहार की भूमिका अहम, केंद्र से सहयोग की जरूरत : मुख्यमंत्री
विकसित भारत 2047 में बिहार की भूमिका अहम, केंद्र से सहयोग की जरूरत : मुख्यमंत्री
पटना, 11 जून (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार अब राष्ट्र की विकास यात्रा का केवल सहभागी नहीं, बल्कि समावेशी मानव विकास के मॉडल के रूप में उभर रहा है और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र से कई परियोजनाओं के लिए सहयोग चाहिए।
बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास एजेंडा को विस्तार से प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने शिक्षा, रोजगार, कृषि, उद्योग, पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्रों में बिहार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। साथ ही जल जीवन मिशन से जुड़े लंबित भुगतान और नई योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, चौधरी ने कहा कि राज्य में बाल्यावस्था शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में व्यापक कार्य किए गए हैं। हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा बच्चों को ‘अपार’ (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) पहचान पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य के अधिकांश सरकारी विद्यालय इंटरनेट से जुड़े हैं और हजारों स्मार्ट कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा सुनिश्चित की गई है तथा स्कूल से बाहर रह गए किशोरों को ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से पुनः शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
युवा और कौशल विकास के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत बड़ी संख्या में कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। पटना में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल केंद्र बनाया जा रहा है। उन्होंने कौशल शिक्षा के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता, कौशल विश्वविद्यालय के विकास तथा भागलपुर में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि राज्य के 211 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही बिहार में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) तथा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की क्षेत्रीय शाखा स्थापित करने के लिए केंद्र से सहयोग मांगा ।
खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार ने हाल के वर्षों में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की सफल मेजबानी की है। राज्य वर्ष 2028 के नेशनल यूथ गेम्स, 2030 हॉकी विश्व कप और 2031 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का इच्छुक है तथा इसके लिए केंद्र सरकार के सहयोग की अपेक्षा है।
पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि गया, बोधगया, राजगीर और नालंदा को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क बढ़ने से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।
महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। ‘लखपति दीदी’ योजना के क्रियान्वयन में बिहार देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है और निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भागलपुर जिले के पीरपैंती में एक बड़ी ताप विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं लखीसराय में बैटरी आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत बड़े पैमाने पर छतों पर सौर संयंत्र लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उद्योग और निवेश के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने नई औद्योगिक नीति, सेमीकंडक्टर नीति और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निवेश योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में राज्य ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है। साथ ही 14 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक के दौरान जल जीवन मिशन से संबंधित वित्तीय मांग प्रमुख मुद्दा रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ने ‘हर घर नल का जल’ कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, लेकिन विभिन्न कारणों से केंद्र के हिस्से की राशि प्राप्त नहीं हो सकी है। उन्होंने इस मद में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के भुगतान तथा नई योजनाओं के लिए पांच हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता का अनुरोध किया। इस प्रकार राज्य ने केंद्र सरकार से कुल 18 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की।
भाषा कैलाश
रवि कांत अजय
अजय

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