ब्रिक्स का मुद्राकोष, विश्व बैंक में उभरते बाजारों की आवाज मजबूत करने का आह्वान

ब्रिक्स का मुद्राकोष, विश्व बैंक में उभरते बाजारों की आवाज मजबूत करने का आह्वान

ब्रिक्स का मुद्राकोष, विश्व बैंक में उभरते बाजारों की आवाज मजबूत करने का आह्वान
Modified Date: September 11, 2026 / 05:47 pm IST
Published Date: September 11, 2026 5:47 pm IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के अधिक प्रतिनिधित्व का आह्वान किया है। साथ ही, समूह ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक बिखराव के बीच एकतरफा शुल्कों तथा व्यापार उपायों की आलोचना की है।

ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर (एफएमसीबीजी) ने एक प्रभावी सीमा पार भुगतान व्यवस्था की संभावना पर चर्चा भी की है।

एफएमसीबीजी ने एक संयुक्त बयान में शुक्रवार को कहा, ”हम ब्रिक्स सीमा पार भुगतान पहल पर कजान और रियो घोषणापत्रों में हमारे नेताओं द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के आधार पर, प्रभावी सीमा पार भुगतान तंत्र के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में ब्रिक्स भुगतान कार्यबल (बीपीटीएफ) के प्रयासों की सराहना करते हैं।”

यह संयुक्त बयान दिल्ली में आयोजित हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले सामने आया है।

किसी भी देश का नाम लिए बिना ब्रिक्स सदस्यों ने कहा, ”हम व्यापार और वित्त से संबंधित कार्रवाइयों को एकतरफा थोपने, जिसमें शुल्क और गैर-शुल्क उपायों को बढ़ाना शामिल है, पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। ये व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के प्रतिकूल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के दबावों का सबसे भारी असर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने ”डब्ल्यूटीओ को केंद्र में रखते हुए एक खुली, पारदर्शी, समावेशी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली” के लिए समर्थन जताया।

ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिका की व्यापार और शुल्क नीतियों ने वैश्विक व्यापार को बाधित किया है। दो अप्रैल, 2025 को ”मुक्ति दिवस” (लिबरेशन डे) घोषित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, ब्राजील, रूस और चीन सहित कई देशों पर व्यापक जवाबी शुल्कों की घोषणा की थी।

हालांकि इन शुल्कों को फरवरी में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने 24 जुलाई से भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया।

बयान में कहा गया कि बीपीटीएफ ने भुगतान और संदेश भेजने वाले माध्यमों को सीमा पार एक-दूसरे के अनुकूल बनाने का भी अध्ययन किया। इसके अलावा, ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल कर व्यापार के भुगतान और निवेश को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।

इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए कार्यबल से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करने और इस बात को स्वीकार करने के लिए कहा गया है कि कोई भी एक तरीका सभी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।

वैश्विक उत्पादन और वृद्धि में उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ, वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार ब्रिक्स की निरंतर प्राथमिकता बना हुआ है। बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ब्रिक्स सदस्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना जारी रखा जाएगा।

एफएमसीबीजी ने ब्रेटन वुड्स संस्थानों (बीडब्ल्यूआई) की वैधता बढ़ाने के लिए उन्हें अधिक चुस्त, प्रभावी, विश्वसनीय, समावेशी, उद्देश्य के अनुकूल, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के लिए इनमें सुधार की तत्काल आवश्यकता को दोहराया। बीडब्ल्यूआई में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक शामिल हैं।

बयान में कहा गया कि बीडब्ल्यूआई में ईएमडीई की आवाज और प्रतिनिधित्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी सापेक्ष स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।

एफएमसीबीजी ने आईएमएफ कोटा और शासन सुधार के लिए ‘ब्रिक्स रियो डी जनेरियो विजन’ की पुष्टि की। साथ ही, अपने सदस्यों, विशेष रूप से सबसे कमजोर देशों को प्रभावी ढंग से समर्थन देने के लिए एक मजबूत, कोटा-आधारित और पर्याप्त संसाधनों से संपन्न आईएमएफ की आवश्यकता पर बल दिया।

नव विकास बैंक (एनडीबी) के संबंध में संयुक्त बयान में कहा गया, ”इसके दूसरे स्वर्णिम दशक में प्रवेश करने के साथ हम ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण में विकास तथा आधुनिकीकरण के एक मजबूत एवं रणनीतिक कारक के रूप में एनडीबी की बढ़ती भूमिका को मान्यता देते हैं और उसका समर्थन करते हैं।”

बयान में बैंक को संसाधन जुटाने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण का विस्तार करने, परियोजना-तैयारी सुविधाओं को मजबूत करने, वित्तपोषण स्रोतों में विविधता लाने, नवाचार को बढ़ावा देने और सदस्य देशों में समावेशी तथा टिकाऊ वृद्धि में योगदान देने वाली परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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