भारत को मिल रहा जनसांख्यिकीय लाभांश, ‘नाराज फूफा जी’ उठाते हैं वृद्धि पर सवाल : सीतारमण

भारत को मिल रहा जनसांख्यिकीय लाभांश, ‘नाराज फूफा जी’ उठाते हैं वृद्धि पर सवाल : सीतारमण

भारत को मिल रहा जनसांख्यिकीय लाभांश, ‘नाराज फूफा जी’ उठाते हैं वृद्धि पर सवाल : सीतारमण
Modified Date: September 11, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: September 11, 2026 5:34 pm IST

मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारत की वृद्धि की गति और जनसांख्यिकीय लाभांश पर लगातार सवाल उठाने वाले आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश इस समय जनसंख्या से जुड़े लाभ का अनुभव कर रहा है।

सीतारमण ने यहां आयोजित वित्तीय-प्रौद्योगिकी सम्मेलन वैश्विक फिनटेक सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि टेलीविजन स्टूडियो में ‘नाराज फूफा जी’ यह बहस करते रहते हैं कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश खत्म हो गया है या बोझ बन गया है।

उन्होंने कहा कि कुछ टिप्पणीकार भारत की जनसांख्यिकीय वृद्धि को ‘लगातार निराशावाद’ के नजरिये से देखते हैं और वास्तविक आंकड़ों के बजाय ‘वाइबकास्टिंग’ (धारणा और माहौल के आधार पर आकलन करना) पर यकीन करते हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘‘कुछ टिप्पणीकारों में भारत की जनसांख्यिकीय वृद्धि को लगातार निराशावाद के नजरिये से देखने की आदत बनी हुई है।’’

उन्होंने ऐसे आलोचकों को ‘नाराज फूफा जी’ बताते हुए कहा कि वे अपना समय इस बहस में लगाते हैं कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश खत्म हो गया है या बोझ बन गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे आलोचक 21वीं सदी की आर्थिक महत्वाकांक्षा को 20वीं सदी के नजरिये से देखते हैं और सवाल उठाते हैं कि क्या भारत की वृद्धि उसकी युवा आबादी के साथ कदम मिला सकती है।

सीतारमण ने कहा, ‘जब ये लोग बीते दौर के जवाबों का इंतजार करते रह गए, तब देश के युवा इन संदेहों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ गए। उन्होंने नए उद्यम खड़े किए, कोड लिखे तथा भारत के भविष्य को आकार देना शुरू कर दिया।’

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अपनी उत्पादकता को साबित करने के लिए पुराने पैमानों की मान्यता का इंतजार नहीं कर रही है। यह पीढ़ी नए दौर की प्रौद्योगिकी विकसित करने, टिकाऊ उद्यम खड़े करने और यह साबित करने में जुटी है कि भारत का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभ एक सक्रिय और लगातार बढ़ने वाली हकीकत है।

सीतारमण ने सभा में मौजूद लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये लोग भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश की ‘जीवंत वास्तविकता’ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे केवल इस सभागार को देखने के लिए कहूंगी। मेरे सामने जो कुछ है, वह हमारे जनसांख्यिकीय लाभांश की जीवंत वास्तविकता है।’’

कृत्रिम मेधा (एआई) को ‘दोधारी तलवार’ बताते हुए सीतारमण ने कहा कि यह धोखाधड़ी का तेजी से पता लगाने में मदद करती है, लेकिन हमलावरों को बड़े और अधिक जटिल साइबर हमले करने में भी सक्षम बनाती है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सुरक्षा उपायों के अप्रासंगिक हो जाने के पहले क्वांटम कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पारंपरिक सुरक्षा और एन्क्रिप्शन प्रणालियों को भी उन्नत करने की जरूरत है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि न तो डर के कारण नवाचार को रोकना पड़े और न ही तेजी के कारण सुरक्षा से समझौता करना पड़े। हमें अनावश्यक प्रक्रियागत अड़चनों और उन जरूरी सुरक्षा उपायों के बीच अंतर करना चाहिए, जिनमें प्रणाली की सुरक्षा के लिए अंतर्निहित जांच, मानवीय निगरानी और आपात स्थिति में व्यवस्था को रोकने वाली सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।’’

उन्होंने कहा कि अधिक तेजी के साथ अधिक भरोसा कायम हो, इसके लिए सही सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना हमारी जिम्मेदारी है। कार्यकुशलता और सुरक्षा को एक-दूसरे का विरोधी लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि संस्थागत व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि दोनों एक-दूसरे को मजबूत करें।

सीतारमण ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि नवाचार से कार्यकुशलता बढ़े, लेकिन इसके साथ व्यवस्था में नई तरह की कमजोरियां भी पैदा न हों।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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