कैग ने बीते दशक में दिल्ली के स्थानीय निकायों को कम वित्तपोषण पर सवाल उठाए
कैग ने बीते दशक में दिल्ली के स्थानीय निकायों को कम वित्तपोषण पर सवाल उठाए
नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि पिछले एक दशक में दिल्ली सरकार द्वारा स्थानीय निकायों और अन्य संस्थानों को दी गई वित्तीय सहायता का बहुत छोटा हिस्सा ही पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में खर्च हुआ जबकि अधिकांश राशि रोजमर्रा के खर्चों में चली गई।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य वित्त पर कैग की यह रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2015-16 से 2024-25 के दौरान कुल वित्तीय सहायता में से केवल छह प्रतिशत से लेकर 27 प्रतिशत ही पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए उपयोग किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में स्थानीय निकायों एवं अन्य संस्थानों को दी गई 73 से 94 प्रतिशत वित्तीय सहायता वेतन, रखरखाव और अन्य दैनिक खर्चों में खर्च हुई, जिससे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर कम ध्यान दिया गया।
कैग रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में नगर निगम एवं अन्य निकायों को दी गई कुल वित्तीय सहायता 16,449 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले के 17,047 करोड़ रुपये की तुलना में 3.5 प्रतिशत कम है।
यह कमी मुख्य रूप से नगर निगमों को दिए जाने वाले पूंजीगत अनुदानों में गिरावट के कारण आई, जो 2023-24 के 649 करोड़ रुपये से घटकर 2024-25 में 499 करोड़ रुपये रह गए।
नगर निगम सबसे बड़े लाभार्थी बने रहे और उन्हें 2024-25 में 9,282 करोड़ रुपये मिले, जो पिछले वर्ष के 8,596 करोड़ रुपये से अधिक है।
अन्य संस्थानों में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को 2,620 करोड़ रुपये, दिल्ली जल बोर्ड को 633 करोड़ रुपये और दिल्ली शहरी शेल्टर सुधार बोर्ड को 162 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए कुल अनुदान 2024-25 में घटकर 1,110 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल सहायता का मात्र 6.75 प्रतिशत है और पिछले दशक के सबसे निचले स्तर में से एक है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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