बेंगलुरु, सात मई (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के. संजय मूर्ति ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत 101 शहरों में नागरिकों के नजरिये से ‘जीवन की सुगमता’ का आकलन करने के लिए एक विशेष ऑडिट कर रहा है।
मूर्ति ने ‘ब्रिक्स सुप्रीम ऑडिट इंस्टीट्यूशंस (एसएआई) लीडर्स समिट’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऑडिट जीवन गुणवत्ता, सेवाओं तक पहुंच, स्थिरता और नागरिकों की धारणा जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कैग देश में विभिन्न परिवहन व्यवस्थाओं और पूरी परिवहन श्रृंखला (फर्स्ट-माइल से लास्ट-माइल तक) का भी ऑडिट कर रहा है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) और विश्व बैंक जैसे संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है।
ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता भारत के पास रहने के दौरान आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘शहरी गतिशीलता पर फोकस के साथ जीवन की सुगमता’ है। इसमें ब्रिक्स देशों के शीर्ष ऑडिट संस्थानों के प्रमुख सहित 42 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
मूर्ति ने कहा कि भारत के शहर देश के कुल भूभाग का केवल तीन प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं, लेकिन देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 60 प्रतिशत योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि 2030 तक देश में सृजित होने वाली 70 प्रतिशत नई नौकरियां शहरों में होंगी।
कैग ने कहा, “शहरी गतिशीलता वह क्षेत्र है जहां शासन सीधे नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ता है। यह वह पैमाना है, जिस पर लोग रोजाना अपनी सरकार का आकलन करते हैं।”
मूर्ति ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ट्रैफिक जाम 2025 तक बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाने से शहरी यात्रियों का हर साल 100 से 180 घंटे तक का उत्पादक समय नष्ट होता है।
उन्होंने कहा कि समाधान की कमी नहीं, बल्कि समन्वित शासन की कमी असल समस्या है। उन्होंने कहा, “हम मेट्रो बनाते हैं जो बस नेटवर्क से नहीं जुड़ती, फ्लाईओवर बनाते हैं जो जाम को महज एक जगह से दूसरी जगह से जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि अब केवल सड़कों की लंबाई या स्टेशनों की संख्या जैसे आंकड़ों के बजाय यात्रा के समय में कटौती, वायु गुणवत्ता में सुधार और समान पहुंच जैसे वास्तविक परिणामों पर ध्यान देना जरूरी है।
मूर्ति ने कहा कि पारंपरिक ऑडिट रिपोर्ट के अलावा कैग अब विभागीय सराहना नोट, प्रबंधन पत्र और अध्ययन रिपोर्ट जैसे अतिरिक्त उत्पाद भी दे रहा है।
इस सम्मेलन में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के ऑडिट संस्थानों की प्रस्तुतियां भी होंगी। सम्मेलन का समापन ‘बेंगलुरु घोषणा’ और 2027-28 कार्य योजना को अपनाने के साथ होगा।
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प्रेम रमण
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