नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) देश में ‘हाइब्रिड एन्युटी मॉडल’ (एचएएम) यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत बनाई जा रही सड़क परियोजनाओं का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय से पीछे चल रहा है लेकिन उनकी ऋण जोखिम प्रोफाइल स्थिर बनी हुई है। क्रिसिल ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि रियायत समझौते में मौजूद सुरक्षा प्रावधानों के चलते इन परियोजनाओं के जोखिम पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
यह समझौता सरकार और निजी कंपनी के बीच होता है जिसमें कंपनी को कुछ शर्तों और भुगतान व्यवस्था के साथ किसी परियोजना के निर्माण एवं संचालन की अनुमति दी जाती है।
एचएएम मॉडल के तहत सरकार निर्माण कंपनी को तय अवधि तक एक निश्चित भुगतान (एन्युटी) करती है।
क्रिसिल ने कहा कि इन सड़क परियोजनाओं के निर्माण में देरी मुख्य रूप से रियायत देने वाले प्राधिकरण द्वारा समय विस्तार दिए जाने के कारण हुई। इसकी वजह यह है कि परियोजनाओं में विलंब के कारण निर्माण कंपनी के नियंत्रण से बाहर थे।
एजेंसी ने बताया कि इसकी वजह से लागत बढ़ने के बावजूद अनुबंध में महंगाई से जुड़ी समायोजन व्यवस्था होने से ऋण प्रोफाइल पर असर सीमित ही रहेगा।
करीब 75 प्रतिशत मामलों में ‘राइट ऑफ वे’ यानी भूमि उपलब्धता का न होना निर्माण में देरी का मुख्य कारण है। इसके अलावा पर्यावरण एवं वन मंजूरी, डिजाइन स्वीकृति, स्थानीय निकायों की अनुमति में देरी और भारी बारिश एवं विरोध जैसे कारण भी शामिल हैं।
क्रिसिल का यह निष्कर्ष 72 निर्माणाधीन परियोजनाओं (करीब 2,600 किमी) के विश्लेषण पर आधारित है। ये परियोजनाएं 2021 से 2025 के बीच शुरू हुईं और कुल स्वीकृत लंबाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हैं।
क्रिसिल के निदेशक आनंद कुलकर्णी ने कहा कि निर्माण में देरी से लागत बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है और परियोजनाओं की लागत में औसतन 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत परियोजनाएं औसतन 11 महीने से अधिक की देरी का सामना कर रही हैं।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण