(लक्ष्मी देवी ऐरे द्वारा)
नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने झारखंड और नगालैंड में बीजों की कमी और तमिलनाडु में आपातकालीन स्थिति के लिए लगभग शून्य बफर स्टॉक को लेकर चिंता जताई है। वहीं इस खरीफ सत्र में प्रमाणीकृत और अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की कुल राष्ट्रीय उपलब्धता जरूरत से ज्यादा है।
झारखंड में सबसे ज्यादा कमी है – यहां जरूरत 3,91,629 क्विंटल की है, जबकि उपलब्धता 3,09,421 क्विंटल की ही है, जिससे सभी फसलों को मिलाकर 82,208 क्विंटल का अंतर है।
मंत्रालय ने सभी राज्यों को जारी एक परामर्श में इसे ‘‘सभी फसलों में भारी कमी वाला एकमात्र राज्य’’ बताया है।
इसमें कहा गया, ‘‘राज्य के लिए राष्ट्रीय बीज आरक्षित भंडार से 2,860 क्विंटल का आवंटन इस अंतर को भरने के लिए काफी नहीं है।’’
झारखंड से कहा गया है कि वह तुरंत फसल-वार उपलब्धता की समीक्षा करे और केंद्रीय कृषि मंत्रालय, पड़ोसी राज्यों के बीज निगम और राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) के साथ सलाह-मशविरा करके राज्यों के बीच बीजों की आवाजाही शुरू करे।
नगालैंड में 368 क्विंटल बीज की की थोड़ी कम कमी है – जरूरत 6,718 क्विंटल बीज की है, जबकि उपलब्धता 6,350 क्विंटल की है और उसे एनएससी, सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों या पड़ोसी राज्यों से कमी को पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
तमिलनाडु की स्थिति अलग है, लेकिन उतनी ही चिंताजनक है। इस दक्षिणी राज्य में जरूरत 7,20,877 क्विंटल बीज की है, जबकि बीजों की उपलब्धता 7,22,095 क्विंटल है, जो सिर्फ 1,217 क्विंटल की मामूली बढ़त दिखाती है।
मंत्रालय के परामर्श परिपत्र में कहा गया, ‘‘तमिलनाडु में बफर स्टॉक लगभग शून्य होने से आपातकालीन स्थिति के लिए कोई गुंजाइश नहीं बचती है – अगर बारिश में देरी होती है या फसल बदली जाती है, तो राष्ट्रीय स्तर पर अधिशेष वाले राज्यों से अतिरिक्त खरीद की जरूरत होगी।’’
राष्ट्रीय स्तर पर, कुल उपलब्धता 192.43 लाख क्विंटल बीज की है, जो खरीफ की 172.98 लाख क्विंटल बीज की जरूरत से काफी ज्यादा है। अच्छी-खासी अतिरिक्त मात्रा वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात और बिहार शामिल हैं।
कई राज्यों — त्रिपुरा (15,890 क्विंटल), अरुणाचल प्रदेश (21,167 क्विंटल), हिमाचल प्रदेश (21,150 क्विंटल), गोवा (3,840 क्विंटल), मेघालय (17,279 क्विंटल), सिक्किम (473.9 क्विंटल), केरल (21,253 क्विंटल) और पुडुचेरी (1,430 क्विंटल) — में उपलब्धता बस जरूरत के बराबर ही है।
मंत्रालय ने इस सत्र के लिए 1,74,325 क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार (एनएसआर) लक्ष्य तय किया है। एनएसआर में कम और मध्यम अवधि वाले प्रमाणीकृत और फाउंडेशन बीज शामिल हैं, जिनमें सूखा और गर्मी सहने वाली किस्में भी हैं, जिन्हें एनएससी संभालता है। राज्यों से कहा गया है कि वे जिला-स्तर के आकलन के आधार पर बीज की मात्रा तय करें।
केंद्र ने इस खरीफ सत्र के लिए अल-नीनो को एक बड़ा जोखिम बताया है और राज्यों से कहा है कि वे ब्लॉक और जिला स्तर पर पहले से योजना बनाते समय इसे ध्यान में रखें।
राज्यों से कहा गया है कि वे केन्द्रीय ‘ड्राइलैंड एग्रीकल्चर’ शोध संस्थान (सीआरआईडीए), केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और राष्ट्रीय वर्षो सिचिंत क्षेत्र प्राधिकार (एनआरएए) की सलाहों का पालन करें, जो वैज्ञानिक तरीकों से मौसम के रुख और नमी के स्तर पर नजर रख रहे हैं।
सलाह में कहा गया, ‘‘चुनौती राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धता की नहीं, बल्कि मानसून शुरू होने से पहले जिला और ब्लॉक स्तर पर सही किस्म के बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की है।’’
खरीफ की बुवाई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने के साथ शुरू होती है। इस साल मॉनसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह तय समय से लगभग 4-5 दिन पीछे है, जबकि अल-नीनो की स्थितियों ने बारिश और बुवाई की प्रगति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 12 जून तक खरीफ की बुवाई 84.50 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो रकबा पिछले साल इसी अवधि में हुई 88.04 लाख हेक्टेयर की बुवाई से कम है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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