नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि यूरिया, डीएपी और सल्फर ला रहे चार मालवाहक जहाज अब भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज पिछले सप्ताह पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजरे थे।
ये जहाज कृष्णापत्तनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा जा रहे हैं। वहां पहुंचने पर, खरीफ सत्र से पहले खेती-बाड़ी की जरूरतों को पूरा करने और मौजूदा उर्वरक भंडार को बढ़ाने के लिए कार्गो को उतारा जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि एक मार्च को संकट शुरू होने के बाद से घरेलू उर्वरक उत्पादन 133.12 लाख टन तक पहुंच गया है, जबकि आयात 43.69 लाख टन रहा है।
बयान के अनुसार, भारत ने अपने हाल की वैश्विक निविदा में 17.70 लाख टन यूरिया का अनुबंध भी किया है। इससे खरीफ सत्र के लिए यूरिया और पी एंड के (फॉस्फेट और पोटाश) उर्वरक की कुल आपूर्ति 90 लाख टन से अधिक हो गई है।
ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड से यूरिया की आपूर्ति तय की गई है। डीएपी और एनपीके की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से लाल सागर के रास्ते लाई जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि 22 जून तक कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन था, जो एक साल पहले 168.67 लाख टन था। यूरिया का भंडार 69.21 लाख टन से बढ़कर 81.44 लाख टन हो गया। वहीं डीएपी का भंडार 16 लाख टन से बढ़कर 20.92 लाख टन और एनपीके का भंडार पिछले साल की इसी अवधि के 46.13 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 55.91 लाख टन हो गया।
म्यूरेट ऑफ पोटाश (एकओपी) का भंडार 10.68 लाख टन से बढ़कर 12.68 लाख टन हो गया, जबकि सिंगल सुपर फॉस्फेट का भंडार थोड़ा कम होकर 25.13 लाख टन रहा जा एक साल पहले 26.65 लाख टन था।
एक मार्च से कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में 140.2 लाख टन थी। इसमें 79.1 लाख टन यूरिया, 34.8 लाख टन एपीके और 19.8 लाख टन डीएपी शामिल था।
मंत्रालय ने कहा कि वह राज्य सरकारों, वितरण एजेंसियों और सहकारी नेटवर्क के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि उर्वरक की उपलब्धता ‘मजबूत, स्थिर और प्रबंधित’ बनी रहे।
भाषा रमण अजय
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