नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) रियल एस्टेट कंपनियों के निकाय नारेडको-महाराष्ट्र ने केंद्र और राज्य सरकारों से शहरी क्षेत्रों में किराये के मकान के विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल करने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि मकान खरीदना मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) ने आवासीय रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) को बढ़ावा देने के लिए एक नयी रूपरेखा तैयार करने की भी मांग की है।
संगठन ने रियल एस्टेट क्षेत्र में सुचारू पूंजी प्रवाह के लिए घरेलू वित्तीय संस्थानों को मजबूत करने पर भी जोर दिया। यह क्षेत्र 200 से अधिक सहायक उद्योगों को समर्थन देता है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करता है।
नारेडको-महाराष्ट्र के अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा, ‘‘भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश में तेजी से शहरीकरण और घरों की बढ़ती मांग को देखते हुए नीतिगत रूपरेखा को किफायती, किराये के आवास, संस्थागत वित्त की उपलब्धता और विकास की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित करने की जरूरत है।’’
क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए नारेडको-महाराष्ट्र तीन सितंबर को मुंबई में ‘रियल एस्टेट एवं बुनियादी ढांचा निवेशक शिखर सम्मेलन’ (आरईआईआईएस 2026) आयोजित करेगा।
सम्मेलन का विषय ‘भारत की विकास गाथा को नए सिरे से परिभाषित करना’ है। इसका उद्देश्य भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सम्मेलन का उद्घाटन कर सकते हैं। इसमें प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर और वित्तीय संस्थान भी हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन में विदेशी निवेशकों के भी शामिल होने की उम्मीद है। संगठन का अनुमान है कि इस सम्मेलन से 10,000 करोड़ रुपये तक का विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
ठाकुर ने क्षेत्र की चुनौतियों और संभावित समाधान पर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को किराये के आवास पर कहीं अधिक नीतिगत ध्यान देने की जरूरत है। खासकर बड़े शहरी केंद्रों में जहां पिछले चार-पांच वर्षों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है।
भाषा रमण अजय
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