नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार ई-वे बिल ढांचे में सुधार के लिए राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। इस पर जीएसटी परिषद की अगली बैठक में चर्चा होगी।
पिछले सप्ताह जारी आर्थिक समीक्षा में कहा गया था कि जीएसटी सुधारों में अगली कड़ी ई-वे बिल प्रणाली को केवल प्रवर्तन और नियंत्रण के साधन के बजाय सुगम माल ढुलाई के साधन के रूप में पुनर्परिभाषित करने पर केंद्रित हो सकती है।
ई-वे बिल सुधारों से माल ढुलाई व्यवस्था का काफी हद तक विनियमन कम होगा। इससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी। साथ ही कर प्रशासन के लिए प्रभावी और बिना हस्तक्षेप वाली निगरानी बनी रहेगी।
सूत्र ने कहा, ‘‘हम ई-वे बिल सुधार पर राज्यों के साथ काम कर रहे हैं और इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखेंगे।’’
केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में और राज्य मंत्रियों से मिलकर बनी जीएसटी परिषद की पिछली बैठक तीन सितंबर, 2025 को हुई थी। इसमें 375 वस्तुओं पर कर दरों में कटौती और स्लैब को युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद ई-वे बिल का प्रस्ताव जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जाएगा।
समीक्षा में ई-सील और ‘इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग’ प्रणाली के व्यापक उपयोग का सुझाव दिया गया है। इन्हें ई-वे बिल और वाहन निगरानी प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि सड़क पर बार-बार रोके बिना माल की सुरक्षित और संपूर्ण निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
क्षेत्रीय स्तर पर नियमों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली राज्य सरकारों को जोखिम-आधारित, प्रणाली-जनित अलर्ट की ओर बदलाव और सोच-विचार किये जाने वाली जांच को सीमित करने में एक प्रमुख भागीदार बनना होगा।
समीक्षा में विश्वास-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित अनुपालन मॉडल पर अधिक निर्भरता वाली नीतिगत रूपरेखा का भी सुझाव दिया गया।
एक जुलाई, 2017 को जब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया, तो राज्यों में भौतिक रूप से काम करने वाली ‘जांच चौकी’ समाप्त कर दी गयी, जो एक बड़ा संरचनात्मक सुधार था। इससे माल की निर्बाध आवाजाही में काफी सुधार हुआ और पारगमन में होने वाली देरी में कमी आई।
ई-वे बिल प्रणाली एक प्रभावी डिजिटल विकल्प के रूप में उभरी। इससे माल की आवाजाही की ऑनलाइन निगरानी संभव हुई। इससे राज्य सीमाओं पर भौतिक बाधाओं को पुनः लागू किए बिना कर प्रशासन के उद्देश्यों को समर्थन मिला।
जीएसटी के तहत, 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का माल ले जाने वाले व्यक्ति को ई-वे बिल लेना अनिवार्य है। माल परिवहन से पहले जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति या माल ढुलाई करने वालों द्वारा जीएसटी पोर्टल से यह दस्तावेज लेना आवश्यक है।
भाषा रमण अजय
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