एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के लिए दिशानिर्देश जारी

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एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के लिए दिशानिर्देश जारी

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 09:51 PM IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को एक लाख करोड़ रुपये के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (यूसीएफ) के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए। इसके तहत केंद्र सरकार का योगदान कुल परियोजना लागत के 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगा, जबकि राज्य और शहरी स्थानीय निकाय शेष लागत का एक हिस्सा वहन करेंगे।

मनोहर लाल ने 5,000 करोड़ रुपये की कर्ज भुगतान गारंटी उप-योजना (सीआरजीएसएस) की भी शुरुआत की। यह पिछले वर्ष के बजट में घोषित शहरी स्थानीय निकायों द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं के लिए ऋण सहायता के लिए गारंटी प्रदान करेगी।

यूसीएफ के दिशानिर्देशों के अनुसार, कम से कम 50 प्रतिशत राशि नगरपालिका बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसी बाजार व्यवस्था के माध्यम से जुटाई जाए जाने की संभावना है।

कुल व्यय में से 90,000 करोड़ रुपये परियोजना कार्यान्वयन के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 5,000 करोड़ रुपये परियोजना निर्माण और क्षमता निर्माण के लिए तथा 5,000 करोड़ रुपये ऋण भुगतान गारंटी उप-योजना के लिए आवंटित किए गए हैं।

इस कोष को वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल चार लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ कार्यान्वित किया जाएगा। इसे तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

मंत्री कहा कि अगले पांच से छह महीनों में सरकार राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को राशि जारी करना शुरू कर देगी।

उन्होंने कहा कि ‘अर्बन चैलेंज फंड’ देश भर में शहरी विकास परियोजनाओं के लिए लगभग चार गुना निवेश जुटाने में उत्प्रेरक का काम करेगा।

अधिकारियों ने कहा कि इस वित्तपोषण व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना, जवाबदेही बढ़ाना और शहरी अवसंरचना परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

कर्ज भुगतान गारंटी उप-योजना से छोटे शहरों, विशेष रूप से दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों, साथ ही पहाड़ी और उत्तरपूर्वी क्षेत्रों को ऋण गारंटी के माध्यम से बाजार आधारित वित्तपोषण तक बेहतर पहुंच प्राप्त होने से लाभ होने की उम्मीद है।

मनोहर लाल ने कहा, ‘‘अर्बन चैलेंज फंड देश के शहरी विकास के दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है। यह कोष केवल अनुदान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक निधियों का उपयोग करके बड़े निवेशों को गति प्रदान करने और शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत और निवेश के लिए तैयार बनाने के बारे में है।’’

भाषा रमण अजय

अजय